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आधी रात गांव में घुसी शेरनी: तीन शावक उसके पीछे-पीछे गलियों में दौड़ते रहे, CCTV वीडियो देख बंधी लोगों की घिग्‍घी

Lioness Entered Village: एक गांव में आधी रात एक शेरनी अपने तीन शावकों के साथ घुस आई. गली में घूमते शेरों का यह वीडियो देखकर स्‍थानीय लोग डरे हुए हैं. ये वीडियो सोशल मीडिया पर भी देखा जा रहा है.

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गुजरात: हुदली गांव में शिकार की तलाश में घुसा शेरों का कुनबा

गुजरात से एक बार फिर इंसानी बस्ती में शेरों की चहलकदमी का मामला सामने आया है. यहां अमरेली के हुदली गांव में आधी रात के सन्नाटे को चीरते हुए एक शेरनी अपने तीन नन्हे शावकों के साथ गांव की मुख्य गली में घुस आई. शिकार की तलाश में रिहायशी इलाके के भीतर पहुंचे शेर वहां एक सीसीटीवी (CCTV) कैमरे में कैद हो गए, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर देखा जा रहा है.

वीडियो में नजर आ रहा है कि शेरनी आगे-आगे शांत मुद्रा में चल रही है और उसके पीछे-पीछे तीन छोटे शावक दौड़ रहे हैं. वन्यजीवों की आहट पाते ही गांव के आवारा कुत्तों ने जोर-जोर से भौंकना शुरू कर दिया, जिसके बाद शेरनी ने कुछ पल रुककर पीछे मुड़कर देखा और फिर अपने शावकों के साथ आगे बढ़ गई. हालांकि, गनीमत यह रही कि शेरों ने किसी ग्रामीण या पालतू मवेशी पर हमला नहीं किया और कुछ देर बाद चुपचाप जंगल की ओर लौट गए.

शेरनी देखकर ग्रामीणों में दहशत का माहौल

इस घटना के बाद से स्थानीय ग्रामीणों में दहशत का माहौल है और लोग रात के समय घरों से बाहर निकलने में अत्यधिक सावधानी बरत रहे हैं. वन विभाग को इस संबंध में सूचित कर दिया गया है, जिसके बाद टीम ने क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है.

गुजरात के जंगल में रहते हैं सबसे ज्‍यादा शेर

गुजरात में गिर के जंगलों और उसके आसपास के रिहायशी इलाकों में शेरों का इंसानी बस्तियों में आना अब आम हो चुका है. अक्सर भोजन और पानी की तलाश में ये वन्यजीव गांवों में घुस आते हैं और बाड़ों में बंधे मवेशियों (गाय, भैंस, बकरी) का शिकार कर ले जाते हैं.

वन्यजीवों के जनसांख्यिकीय अनुमानों और वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, गुजरात में एशियाई शेरों (Asiatic Lions) की मौजूदा आबादी 700 से 750 के बीच पहुंच चुकी है. इन शेरों का मुख्य और प्राकृतिक आशियाना गिर राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभ्यारण्य (Gir National Park) है.

शेर के निवास का विस्तार क्षेत्र: गिर के अलावा, शेरों की बढ़ती आबादी के कारण अब इनका दायरा गिर सोमनाथ, अमरेली, जूनागढ़, भावनगर और पोरबंदर जिलों के राजस्व क्षेत्रों, तटीय पट्टियों और सामुदायिक वनों तक फैल चुका है, जिसे ‘ग्रेटर गिर’ (Greater Gir) क्षेत्र कहा जाता है.



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