China Nuclear Silos
China Nuclear Silos: दुनिया भर की सेनाओं और खुफिया एजेंसियों की नजरों से बचकर चीन एक बेहद खतरनाक और खुफिया प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. सैटेलाइट से मिली नई तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि चीन अपने शिनजियांग प्रांत के सुदूर रेगिस्तानी इलाके में ईरान की तर्ज पर हथियारों का एक विशाल ‘पाताल लोक’ यानी भूमिगत (Underground) सैन्य बेस तैयार कर रहा है. इस खुफिया ठिकाने में परमाणु मिसाइलें, अत्याधुनिक लॉन्च पैड्स और विनाशकारी हथियारों को जमीन के सैकड़ों फीट नीचे छिपाकर रखने के लिए मजबूत बंकर बनाए जा रहे हैं. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह कदम आने वाले समय में वैश्विक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है.
सैटेलाइट तस्वीरों से खुला चीन की चालाकी का राज
अंतरराष्ट्रीय मीडिया और रक्षा विश्लेषकों द्वारा जारी की गई सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि शिनजियांग के बंजर और वीरान रेगिस्तान में बड़े पैमाने पर खुदाई का काम चल रहा है. तस्वीरों में जमीन के नीचे जाने वाले कई गुप्त रास्ते, कंक्रीट के मोटे बंकर और ‘मिसाइल साइलो’ (परमाणु मिसाइल रखने और वहीं से दागने वाले अंडरग्राउंड ऊंचे ऊंचे कुएं) साफ नजर आ रहे हैं. चीन इन ठिकानों को इस तरह से डिजाइन कर रहा है कि किसी भी आधुनिक सैटेलाइट या जासूसी विमान के लिए यह पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाए कि जमीन के नीचे किस जगह पर कौन सा हथियार छिपा है.
ईरान की ‘मिसाइल सिटी’ की तर्ज पर हो रहा है निर्माण
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, चीन का यह अंडरग्राउंड बेस काफी हद तक ईरान के उस खुफिया मिसाइल ठिकाने जैसा है जिसे ‘मिसाइल सिटी’ कहा जाता है. ईरान ने भी अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों को अमेरिकी और इजरायली हमलों से बचाने के लिए पहाड़ों और जमीन के नीचे छुपाया हुआ है. अब चीन भी उसी रणनीति को अपना रहा है. शिनजियांग में बनाए जा रहे इन बंकरों की छतें इतनी मोटी और मजबूत कंक्रीट से बनाई जा रही हैं कि उन पर किसी भी बड़े हवाई हमले या बस्टर बम (बम गिराकर बंकर तोड़ने वाले हथियार) का कोई असर न हो.
अमेरिका और ताइवान के साथ बढ़ते तनाव के बीच बड़ा कदम
इंटरनेट और रक्षा मामलों के जानकारों से मिले अन्य इनपुट्स के मुताबिक, चीन पिछले कुछ सालों में अपने परमाणु हथियारों के जखीरे को बहुत तेजी से बढ़ा रहा है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की रिपोर्ट भी बताती है कि चीन के पास वर्तमान में 500 से अधिक चालू परमाणु हथियार हैं, जिन्हें वह 2030 तक बढ़ाकर 1,000 से पार ले जाना चाहता है. ताइवान को लेकर अमेरिका के साथ चल रहे लगातार तनाव और दक्षिण चीन सागर में अपनी दादागिरी बनाए रखने के लिए चीन इस तरह के ‘सरप्राइज अटैक’ और ‘सेकंड स्ट्राइक’ (हमले के बाद भी जवाबी कार्रवाई की क्षमता) वाले ठिकाने तैयार कर रहा है.
यह भी पढ़ें: बिना कैफीन की जादुई कॉफी, क्या बनेगी देश की पसंद?
‘इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें’ तैनात करने की तैयारी
माना जा रहा है कि इस पाताल लोक जैसे बेस में चीन अपनी सबसे आधुनिक ‘डीएफ-41’ (Dongfeng-41) जैसी इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) को तैनात कर सकता है. यह मिसाइलें इतनी खतरनाक हैं कि चीन में बैठे-बैठे ही अमेरिका और यूरोप के किसी भी कोने को निशाना बना सकती हैं. जमीन के नीचे छिपे होने के कारण दुश्मन देश को यह कभी भनक नहीं लगेगी कि चीन कब और किस दिशा से मिसाइल हमला करने वाला है. चीन का यह सीक्रेट मिशन पूरी दुनिया में हथियारों की एक नई रेस शुरू कर सकता है.
भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

