PF Minimum Pension Hike: जिंदगी भर किसी दफ्तर या कारखाने में पसीना बहाने के बाद जब एक कर्मचारी सेवानिवृत्त होता है, तो उसका सबसे बड़ा सहारा उसकी मासिक पेंशन होती है. लेकिन आज के महंगाई के दौर में महीने के महज 1,000 रुपये हाथ में आना किसी मजाक से कम नहीं लगता. ईपीएस-95 (EPS-95) के तहत आने वाले देश के करीब 78 लाख बुजुर्ग पेंशनर्स पिछले एक दशक से इसी कड़वे सच के साथ जीने को मजबूर हैं.
मगर अब सालों के संघर्ष और लंबी प्रतीक्षा के बाद उम्मीद की एक नई किरण नजर आई है. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) नवंबर के महीने में न्यूनतम पेंशन को सीधे साढ़े सात गुना बढ़ाकर 7,500 रुपये प्रति माह करने पर अंतिम मुहर लगा सकता है.
19 नवंबर को गुजरात में मंथन (EPF Minimum Pension hike latest news)
- बैठक का विवरण: ईपीएफओ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड की 240वीं ऐतिहासिक बैठक.
- तारीख और स्थान: 19 नवंबर को गुजरात के प्रसिद्ध गिर (Gir) में आयोजित होगी.
- दिल्ली से बाहर बैठक: वर्षों बाद ऐसा हो रहा है जब सीबीटी की बैठक नई दिल्ली से बाहर किसी दूसरे राज्य में आयोजित की जा रही है.
- मुख्य एजेंडा: कर्मचारी पेंशन योजना 1995 (EPS-95) के तहत न्यूनतम मासिक पेंशन को 1 से बढ़ाकर 7,500 हजार करना.
- यूनियनों की अन्य मांग: 7,500 की बेसिक न्यूनतम पेंशन के साथ-साथ महंगाई भत्ता (DA) और मेडिकल सुविधाएं भी जोड़ी जाएं.
क्यों जरूरी है यह बदलाव? (EPS pension hike update November)
केंद्र सरकार ने सितंबर 2014 में ईपीएस के तहत न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये प्रति माह तय की थी. तब से लेकर आज तक 12 साल बीत चुके हैं, मुद्रास्फीति कई गुना बढ़ चुकी है, लेकिन बुजुर्गों की पेंशन एक पैसे भी नहीं बढ़ी. ट्रेड यूनियनों और पेंशनभोगी संगठनों का कहना है कि महीने के 1,000 रुपये में किसी बीमार बुजुर्ग के 10 दिन की बीपी और शुगर की दवाएं भी नहीं आतीं. पेंशनर्स लंबे समय से जंतर-मंतर से लेकर श्रम मंत्रालय तक ज्ञापन सौंपते रहे हैं कि इसे बढ़ाकर कम से कम जीने लायक स्तर (₹7,500) पर लाया जाए.
इस बार फैसले की उम्मीद
इस बार पेंशन बढ़ोतरी की संभावना केवल अटकलें नहीं हैं, बल्कि इसके पीछे सरकार के हालिया नीतिगत फैसले हैं. सरकार ने ईपीएफओ के दायरे में अनिवार्य न्यूनतम वेतन सीमा को 15 से बढ़ाकर 25 हजार प्रति माह करने का कदम उठाया है, जिससे ईपीएफ कोष में अंशदान का प्रवाह मजबूत हुआ है. केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया पहले ही संकेत दे चुके हैं कि सरकार पेंशन नियमों की व्यापक समीक्षा कर रही है और पेंशनर्स की मांगों पर बेहद संजीदा व सकारात्मक रुख अपना रही है.
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बुजुर्गों के स्वाभिमान की वापसी (EPFO circular minimum pension Hike)
रिटायरमेंट के बाद किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े, यही पेंशन का मूल उद्देश्य है. ₹1,000 की मामूली रकम ने पेंशन को सिर्फ कागजी राहत बनाकर रख दिया था. अगर 19 नवंबर को गिर की धरती से सीबीटी की बैठक में ₹7,500 की न्यूनतम पेंशन को हरी झंडी मिलती है, तो यह देश के लाखों बुजुर्गों के लिए केवल आर्थिक मदद नहीं होगी, बल्कि उनके जीवन के उत्तरार्ध में स्वाभिमान से जीने की गारंटी बनेगी.
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