Gold Silver Price Today: सोने और चांदी की कीमतों ने इन दिनों आम आदमी और निवेशकों दोनों को चक्कर में डाल रखा है. शुक्रवार के कारोबार में सर्राफा बाजार में जबरदस्त हलचल दिखी. एक तरफ जहां कीमतों में तगड़ा उछाल दर्ज किया गया, वहीं दूसरी ओर एमसीएक्स (MCX) पर कुछ गिरावट भी देखने को मिली. अगर आप सोना खरीदने की सोच रहे हैं या निवेश करने का मन बना रहे हैं, तो बाजार का यह उतार-चढ़ाव समझना आपके लिए बेहद जरूरी है.
चांदी की कीमतों में भारी उछाल (Silver Price)
हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को सोने और चांदी की चमक फिर से बढ़ी है. चांदी की कीमतों में 3,580 रुपये का बड़ा उछाल आया, जिससे इसके दाम 2.41 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गए. वहीं, सोने (Gold) की बात करें तो इसमें 2,090 रुपये की तेजी आई और यह 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर ट्रेड करता दिखा.
हालांकि, MCX पर तस्वीर थोड़ी अलग रही. शुरुआती सत्र में वहां सोने का भाव 6,074 रुपये गिरकर ₹1,52,681 पर आ गया, जबकि चांदी 26,518 रुपये सस्ती होकर ₹2,36,500 के आसपास नजर आई. यह अंतर घरेलू हाजिर बाजार और फ्यूचर्स मार्केट के बीच के तालमेल को दर्शाता है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ‘वैल्यू बाइंग’
सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी कीमती धातुओं में खरीदारी का माहौल है. अंतरराष्ट्रीय बाजार (COMEX) में चांदी की कीमतों में अच्छी बढ़त दिखी और यह 77.045 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई. वहीं सोना भी 5,000 डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर के पास हरे निशान में कारोबार करता नजर आया. एक्सपर्ट्स इसे ‘वैल्यू बाइंग’ कह रहे हैं, यानी जब कीमतें गिरती हैं तो बड़े निवेशक इसे खरीदारी का मौका मानकर बाजार में कूद पड़ते हैं.
उतार-चढ़ाव की क्या है वजह?
साल 2026 सोने-चांदी के लिए भारी अस्थिरता वाला साल साबित हो रहा है. पिछले साल की रिकॉर्ड तेजी के बाद, अब ये दोनों धातुएं अपने ऑल-टाइम हाई से 16% से लेकर 43% तक नीचे आ चुकी हैं. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह मजबूत होता अमेरिकी डॉलर और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बदलता रुख है. डॉलर के मजबूत होने से अक्सर सोने की चमक फीकी पड़ जाती है, और हालिया गिरावट इसी का नतीजा है.
एक्सपर्ट्स ने क्या कहा?
मार्केट एक्सपर्ट्स और एमके वेल्थ जैसी ब्रोकरेज फर्म्स का मानना है कि घबराने की जरूरत नहीं है. विश्लेषकों का कहना है कि सोना और चांदी अभी भी 3 से 5 साल के ‘बुल रन’ में हैं. हालिया गिरावट को एक ‘करेक्शन’ के तौर पर देखा जाना चाहिए.
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह कमजोरी एक बड़ा अवसर हो सकती है. जानकारों की सलाह है कि अपने पोर्टफोलियो में सोने-चांदी को बनाए रखें और अगर नई खरीदारी करनी है, तो गिरावट के समय धीरे-धीरे पैसा लगाएं.
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-भारत एक्सप्रेस
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