India edible oil imports: भारत दुनिया के सबसे बड़े खाद्य तेल (Edible Oil) उपभोक्ताओं में से एक है, लेकिन हम अपनी जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अपील (PM Modi edible oil appeal) की है कि वे खाने के तेल का इस्तेमाल कम करें. पीएम मोदी की इस अपील के पीछे कोई राजनीतिक कारण नहीं, बल्कि देश का वो भारी-भरकम ‘इंपोर्ट बिल’ है जो हमारी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चिंता बन गया है. आइए आंकड़ों के जरिए समझते हैं कि भारत हर महीने कितना तेल आयात करता है और इस पर कितना पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है.
देश की खपत का 66% आता है विदेशों से
भारत अपनी कुल खाद्य तेल खपत का लगभग दो-तिहाई (66%) हिस्सा आयात (Import) से पूरा करता है. आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024-25 में देश ने रिकॉर्ड 160 लाख टन खाने का तेल आयात किया. इसका सीधा मतलब यह है कि भारत में हर महीने औसतन 13.3 लाख टन खाद्य तेल विदेशों से मंगाया जा रहा है. हालांकि, यह मात्रा घरेलू मांग और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के हिसाब से घटती-बढ़ती रहती है. (उदाहरण के लिए, फरवरी 2025 में यह घटकर 9 लाख टन और मार्च 2026 में 11.9 लाख टन रहा).
हर महीने 13,400 करोड़ रुपये का खर्च (edible oil import data India)
खाने के तेल के इस भारी आयात के कारण हर महीने बड़ी मात्रा में भारत की विदेशी मुद्रा देश से बाहर जा रही है. मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर, देश हर महीने खाने के तेल के आयात पर ₹13,400 करोड़ से ज्यादा खर्च करता है. अगर सालाना बात करें तो पिछले साल भारत का कुल खाद्य तेल आयात बिल लगभग ₹1.61 लाख करोड़ तक पहुंच गया था, जो देश की अर्थव्यवस्था पर एक बड़ा बोझ है. इंडोनेशिया-मलेशिया का पाम और ब्राजील का सोयाबीन तेल भारत मंगाता है.
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सस्ते तेलों की सबसे ज्यादा खपत
पाम तेल का दबदबा: सभी प्रकार के खाने के तेलों में पाम तेल (Palm Oil) भारत का सबसे ज्यादा आयात किया जाने वाला तेल है. कुल आयात में इसका हिस्सा लगभग 47% से 50% तक रहता है. भारत मुख्य रूप से इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड से पाम तेल खरीदता है, जिसका इस्तेमाल पैकेट वाले खाने, स्नैक्स और रेस्टोरेंट में खूब होता है.
सोयाबीन तेल का रिकॉर्ड: पाम तेल के अलावा, सोयाबीन तेल के आयात में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. 2024-25 के दौरान देश ने रिकॉर्ड 5.47 मिलियन टन सोयाबीन तेल आयात किया, जिसका ज्यादातर हिस्सा अर्जेंटीना और ब्राजील से आता है.
आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाना जरूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का मुख्य उद्देश्य देश की जनता को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और साथ ही इस भारी-भरकम ‘इंपोर्ट बिल’ में कटौती करना है. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि जब तक भारत तिलहन (Oilseeds) उत्पादन में आत्मनिर्भर नहीं बनता, तब तक विदेशी तेलों पर यह निर्भरता हमारी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाती रहेगी.
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