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क्या आप भी सब्जी की दुकान से लेकर बड़े शोरूम तक हर जगह UPI से पेमेंट करते हैं? अगर हां, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है. संसद में पेश हुए नए ‘पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स (संशोधन) बिल 2027’ के बाद से हर जगह चर्चा है कि क्या अब UPI से पेमेंट करना महंगा हो जाएगा.
आम लोगों की जेब पर कोई असर नहीं
सबसे पहले राहत की बात यह है कि एक आम नागरिक से दूसरे नागरिक को पैसे ट्रांसफर करने (P2P) पर कोई चार्ज नहीं लगेगा. यानी आप अपने दोस्तों या रिश्तेदारों को जैसे पहले फ्री में पैसे भेजते थे, वैसे ही आगे भी भेजते रहेंगे. ग्राहकों की जेब से कोई अतिरिक्त पैसा नहीं कटेगा.
फिर चार्ज किस पर लगेगा?
यह प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) यानी प्रोसेसिंग चार्ज केवल व्यापारियों और दुकानदारों पर लागू होगा. आसान शब्दों में कहें तो जब आप किसी दुकान या शोरूम पर पेमेंट करेंगे, तो उस लेन-देन को प्रोसेस करने के बदले बैंक और पेमेंट कंपनियां व्यापारी से छोटा सा शुल्क ले सकेंगी.
माना जा रहा है कि यह चार्ज केवल 2,000 रुपये से अधिक के बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर ही लागू होगा. चर्चा के अनुसार यह चार्ज 0.25% से 0.30% के बीच हो सकता है. यानी 1,000 रुपये के मर्चेंट पेमेंट पर करीब 2.5 से 3 रुपये का चार्ज बनेगा.
सरकार क्यों ला रही है यह नया नियम?
देश में हर महीने लगभग 23 अरब UPI ट्रांजैक्शन हो रहे हैं. बैंकों और Google Pay, PhonePe जैसी कंपनियों का कहना है कि बिना किसी कमाई के इतने विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्वर और साइबर सुरक्षा को बनाए रखना मुश्किल हो रहा है. इस मामूली चार्ज से डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री को सालाना करीब 13,000 करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा, जिससे सर्विस और मजबूत होगी.
आगे क्या होगा?
अभी सिर्फ बिल पेश हुआ है, तुरंत कोई चार्ज लागू नहीं हुआ है. संसद से मंजूरी मिलने के बाद सरकार और RBI मिलकर तय करेंगे कि यह नियम कब से और किन-किन दुकानों पर लागू किया जाएगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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