Aadhaar Card
प्रयागराज: शादी का रजिस्ट्रेशन कराते समय केवल आधार कार्ड या स्कूल का ट्रांसफर सर्टिफिकेट दिखाना अब पर्याप्त नहीं माना जा सकता. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान साफ किया है कि आधार कार्ड पहचान का दस्तावेज है, लेकिन इसे उम्र साबित करने का पुख्ता प्रमाण नहीं माना जा सकता. वहीं, केवल ट्रांसफर सर्टिफिकेट के आधार पर भी शादी का रजिस्ट्रेशन करना उचित नहीं है.
कोर्ट ने इस मामले को बाल विवाह रोकने की जरूरत से जोड़ते हुए विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया में उम्र के सत्यापन को बेहद जरूरी बताया. साथ ही, उत्तर प्रदेश में शादी के रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए नौ सूत्रीय दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इनका पालन तब तक करना होगा, जब तक उत्तर प्रदेश विवाह पंजीकरण नियमावली, 2017 में जरूरी बदलाव नहीं कर दिए जाते.
उम्र की जांच किए बिना कैसे हुआ शादी का रजिस्ट्रेशन?
यह मामला दीपक पाल की अपील से जुड़ा है. मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी ने पाया कि संबंधित शादी का पंजीकरण आधार कार्ड और ट्रांसफर सर्टिफिकेट के आधार पर किया गया था.
कोर्ट के मुताबिक, आधार कार्ड अपने आप में उम्र का निर्णायक प्रमाण नहीं है. इसी तरह, ट्रांसफर सर्टिफिकेट किशोर न्याय अधिनियम की धारा 94 में बताए गए दस्तावेजों की सूची में शामिल नहीं है. इसके अलावा, इस मामले में ट्रांसफर सर्टिफिकेट का निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सत्यापन भी नहीं कराया गया था.
ऐसे में पंजीकरण अधिकारी के पास दोनों पक्षों की उम्र की पुष्टि करने वाला सत्यापित प्रमाण मौजूद नहीं था. कोर्ट ने माना कि इस तरह दस्तावेजों की जांच किए बिना शादी का रजिस्ट्रेशन करना अधिकारी की जिम्मेदारी को ठीक से निभाने के अनुरूप नहीं है.
इस आदेश का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया में उम्र को लेकर कोई लापरवाही न हो और नाबालिगों की शादी को कानूनी प्रक्रिया के जरिए मान्यता मिलने की आशंका कम की जा सके.
शादी की कानूनी उम्र पूरी होना जरूरी
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि शादी का रजिस्ट्रेशन करने से पहले लड़के और लड़की की उम्र की सही तरीके से जांच होनी चाहिए. मौजूदा कानूनी प्रावधानों के मुताबिक, शादी के लिए लड़के की उम्र कम से कम 21 साल और लड़की की उम्र 18 साल होनी चाहिए.
अगर दस्तावेजों से यह संकेत मिलता है कि शादी करने वाले दोनों पक्षों में से कोई एक निर्धारित उम्र से कम है, या उसकी उम्र को लेकर उचित संदेह पैदा होता है, तो अधिकारी को सामान्य तरीके से रजिस्ट्रेशन आगे नहीं बढ़ाना चाहिए. ऐसी स्थिति में संबंधित विवाह परिवीक्षा अधिकारी और जिलाधिकारी को तुरंत सूचना देने के साथ कानून के मुताबिक जरूरी कार्रवाई करनी होगी.
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन में भी होगी उम्र की जांच
कोर्ट ने राज्य सरकार को ऑनलाइन विवाह पंजीकरण प्रणाली में जरूरी सुधार करने के निर्देश दिए हैं. अब व्यवस्था ऐसी बनाने पर जोर दिया गया है, जिसमें सिर्फ आधार कार्ड का सत्यापन होने से विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी न हो सके.
दोनों पक्षों की जन्मतिथि की जांच अनिवार्य रूप से दर्ज की जानी चाहिए. यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि उम्र की पुष्टि किस दस्तावेज और किस स्रोत से की गई है. यदि सत्यापन अधूरा है या दस्तावेजों में कोई गड़बड़ी सामने आती है, तो आवेदन को आगे बढ़ने से रोकने की व्यवस्था होनी चाहिए.
इसके साथ ही, राज्य सरकार को उम्र साबित करने वाले दस्तावेजों के इस्तेमाल के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करने होंगे. कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया है कि दस्तावेजों की जांच किशोर न्याय अधिनियम की धारा 94 में दिए गए प्रावधानों के अनुरूप की जाए.
अधिकारियों की जिम्मेदारी भी होगी तय
हाई कोर्ट ने स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देश दिया है कि विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया और उम्र के सत्यापन से जुड़े नियमों को स्पष्ट किया जाए. ऑनलाइन पोर्टल पर जांच का पूरा ब्योरा दर्ज होना चाहिए. किसी भी तरह की अनियमितता सामने आने पर उसे चिह्नित किया जाए और अधूरी जांच की स्थिति में प्रमाणपत्र जारी होने की प्रक्रिया अपने आप रुक जाए.
इसके अलावा, रजिस्ट्रार जनरल को आदेश की प्रति सभी जिला जजों तक पहुंचाने को कहा गया है. जिला जजों को जिलाधिकारी, विवाह पंजीकरण अधिकारियों, स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग के अधिकारियों और बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों के साथ बैठक कर आदेश को लागू करने के तरीकों पर चर्चा करनी होगी. इस विषय को जिला स्तर पर निगरानी के लिए होने वाली बैठकों में भी शामिल किया जाएगा.
नियमित निरीक्षण और प्रशिक्षण पर भी जोर
कोर्ट ने अधिकारियों को केवल कागजी निर्देशों तक सीमित न रहने की हिदायत देते हुए निगरानी की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया है. उत्तर प्रदेश के महानिरीक्षक, निबंधन को विवाह पंजीकरण अधिकारियों के लिए राज्य स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कराने को कहा गया है. इसके लिए लखनऊ स्थित न्यायिक प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान के निदेशक से भी समन्वय किया जाएगा.
पंजीकरण विभाग को तय समय पर कार्यालयों का निरीक्षण करना होगा और उसकी रिपोर्ट का रिकॉर्ड रखना होगा. वहीं, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव को हर दो महीने में विवाह पंजीकरण कार्यालयों का निरीक्षण करना होगा. इस दौरान पिछली जांच के बाद पंजीकृत हुई शादियों में से कुछ मामलों का नमूने के तौर पर चयन करके उनके उम्र सत्यापन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाएगी.
निरीक्षण के बाद रिपोर्ट संबंधित जिला जज को भेजनी होगी, ताकि यह पता चल सके कि नियमों का पालन हो रहा है या नहीं और कहीं नाबालिगों के विवाह का पंजीकरण तो नहीं किया जा रहा.
हाई कोर्ट ने अपने निर्देशों के पालन की रिपोर्ट भी मांगी है. मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है. उस दिन संबंधित अधिकारियों की ओर से यह जानकारी दी जानी होगी कि आदेश को लागू करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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