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सार्वजनिक तालाब के अतिक्रमण की जांच को कमीशन गठित, 28 मई को हाईकोर्ट में पेश होगी रिपोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फतेहपुर के मंझनपुर गांव में सार्वजनिक तालाब पर अतिक्रमण की जांच के लिए सिविल जज की अध्यक्षता में आयोग गठित किया है.

Prashant Rai Edited by Prashant Rai

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फतेहपुर जिले की खागा तहसील स्थित मंझनपुर गांव के गाटा संख्या 472 पर स्थित सार्वजनिक तालाब पर अतिक्रमण की जांच के लिए सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के नेतृत्व में एक आयोग गठित करने का आदेश दिया है. अदालत ने तालाब की जमीन की पैमाइश कर आगामी 28 मई 2025 तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है.

यह आदेश न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर ने वरिष्ठ नागरिक जगदीश शरण सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया. याचिका में आरोप लगाया गया कि तालाब की जमीन पर कई पक्षों ने अवैध निर्माण कर अतिक्रमण किया है.

हालांकि, फतेहपुर के जिलाधिकारी ने 9 अप्रैल 2025 को दाखिल व्यक्तिगत शपथ पत्र में कहा कि स्वयं याचिकाकर्ता ने तालाब की जमीन पर अतिक्रमण किया है, जिस पर तहसीलदार खागा की अदालत में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 67 के तहत बेदखली की कार्रवाई की जा रही है.

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता जगदीश सिंह बुंदेला ने 16 अप्रैल को दाखिल जवाब में इन आरोपों को असत्य बताते हुए कहा कि 2021 में राजस्व विभाग की टीम ने जब गाटा संख्या 496 की पैमाइश की थी, तब यह पाया गया था कि लगभग 20 कड़ी जमीन तालाब क्षेत्र में थी, जहां याचिकाकर्ता के चाचा मान सिंह ने केवल बाउंड्री बनाने हेतु नींव भरी थी, कोई निर्माण नहीं किया गया था.

इसके विपरीत, याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि विपक्षी पक्ष संख्या 4 से 8 ने पक्के निर्माण किए हैं और ग्राम पंचायत के प्रधान (विपक्षी संख्या 11) ने तालाब की जमीन पर सड़क बनाकर अतिक्रमण किया है, जिसे हटाने की मांग की गई है.

इसके बाद हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी को एक और शपथ पत्र दाखिल करने का आदेश दिया. जिलाधिकारी ने 7 मई को दूसरा शपथ पत्र प्रस्तुत किया, जिसमें कहा गया कि याचिकाकर्ता ने गाटा संख्या 472 की तालाब की जमीन पर बाउंड्री वॉल का निर्माण किया है, और 5 सितंबर 2023 की लेखपाल रिपोर्ट के आधार पर उनके विरुद्ध धारा 67 के तहत कार्रवाई की गई है.

हालांकि याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने इस रिपोर्ट को गलत बताते हुए 14 मई को जवाबी हलफनामा दाखिल किया, जिसमें कहा गया कि याचिकाकर्ता द्वारा कोई निर्माण नहीं किया गया है, केवल उनके चाचा द्वारा नींव भरी गई थी. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लेखपाल की त्रुटिपूर्ण रिपोर्ट के आधार पर ही जिलाधिकारी ने याची को अतिक्रमणकर्ता घोषित किया और न्यायालय को गुमराह किया गया.

इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने सच्चाई की निष्पक्ष जांच के लिए सिविल जज सीनियर डिवीजन की अध्यक्षता में एक आयोग गठित किया है. साथ ही, आयोग को सुरक्षा देने के लिए पुलिस अधीक्षक फतेहपुर को निर्देशित किया गया है. आयोग द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट अब 28 मई 2025 को न्यायालय के समक्ष पेश की जाएगी.

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-भारत एक्सप्रेस



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