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राजकीय संप्रेक्षण गृह गोरखपुर की दुर्दशा पर हाईकोर्ट सख्त, चीफ जस्टिस ने स्वत: संज्ञान लेकर दर्ज की जनहित याचिका

गोरखपुर के राजकीय संप्रेक्षण गृह में बालकों के अमानवीय हालात और भारी अव्यवस्था को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया. मुख्य न्यायाधीश ने जनहित याचिका दर्ज कर गुरुवार 23 मई को सुनवाई तय की.

Allahabad High Court

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Prashant Rai Edited by Prashant Rai

गोरखपुर स्थित राजकीय संप्रेक्षण गृह (बाल सुधार गृह) में बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार और भारी अव्यवस्था के मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है. हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की है, जिसकी सुनवाई आज, गुरुवार 23 मई को की जाएगी.

यह कार्रवाई हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव द्वारा भेजे गए पत्र के आधार पर की गई है. जस्टिस यादव ने एक अखबार में छपी खबर के माध्यम से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट के महानिबंधक को पत्र लिखा था और इसे जनहित याचिका मानते हुए मुख्य न्यायाधीश के सामने रखने का अनुरोध किया था.

खबर के मुताबिक, गोरखपुर के बाल संप्रेक्षण गृह में आटे में कीड़े पाए गए और वहां रह रहे बच्चों के लिए मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है. बताया गया है कि जिस संप्रेक्षण गृह की क्षमता 100 बच्चों की है, वहां गोरखपुर मंडल के विभिन्न जिलों से आए 257 बच्चे रह रहे हैं.

इस दुर्व्यवस्था का खुलासा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण देवरिया के सचिव और अपर जिला जज के निरीक्षण के दौरान हुआ. उन्होंने यह देखा कि बच्चों को न केवल भीड़भाड़ वाली स्थिति में रखा गया है, बल्कि उनके भोजन, रहन-सहन और सुरक्षा के उचित इंतज़ाम भी नहीं हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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