औरैया डबल मर्डर केस में अखिलेश के करीबी रहे सपा नेता कमलेश पाठक को उम्रकैद
Auraiya Double Murder Case: करीब 6 साल 5 महीने तक मुकदमा चला, 900 से अधिक तारीखें लगीं और 72 गवाहों ने गवाही दी, तब जाकर उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री व सपा नेता रहे कमलेश पाठक सहित कुल 10 आरोपियों को उम्रकैद की सजा मिली. दरअसल औरैया के चर्चित डबल मर्डर केस मामले में सपा के पूर्व विधायक और मंत्री रहे कमलेश पाठक को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. यह सजा एमपी-एमएलए कोर्ट ने सुनाई है. कमलेश पाठक के साथ कुल 10 आरोपियों को भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. कमलेश पाठक पूर्व एमएलसी भी रह चुके हैं.
कमलेश पाठक पर अधिवक्ता और पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रही मंजुल चौबे और उनकी बहन सुधा चौबे की हत्या का आरोप लगाया गया था. जिसमें कोर्ट ने पूर्व सपा नेता सहित सभी 10 आरोपियों को दोषी माना है.
क्या था मामला?
यह पूरा मामला साल 2020 का है. औरैया के नरायनपुर में पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास एक बेशकीमती जमीन थी. जिसपर पूर्व मंत्री कमलेश पाठक और वकील मंजुल चौबे अपना-अपना दावा कर रहे थे. इसी जमीन को दोनों पक्ष अपना-अपना बताते थे.

15 मार्च साल 2020 के दिन इस जमीन पर कब्जे को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए. पंचमुखी हनुमान मंदिर परिसर में ही दोनों पक्षों में जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद हो गया. देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि कमलेश पाठक पक्ष ने मंजुल चौबे पक्ष पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी. इस अंधाधुंध फायरिंग में वकील मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा चौबे (सरकारी टीचर) की हत्या हो गई. इस दौरान कमलेश पाठक पक्ष के हमलावरों ने सुधा चौबे पक्ष के लोगों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा. इस मामले ने पूरे औरैया में हड़कंप मचा दिया था.
योगी सरकार ने 50 करोड़ की संपत्ति की कुर्क
इस डबल मर्डर केस में पुलिस ने कमलेश पाठक और उनके भाइयों को गिरफ्तार कर लिया. इन सभी आरोपियों पर पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट और रासुका (NSA) के तहत कार्रवाई की. उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर प्रशासन ने कमलेश पाठक और उनके भाइयों की 50 करोड़ से अधिक की संपत्ति भी कुर्क कर दी.
अब करीब साढ़े 6 सालों तक चले मुकदमे के बाद एमपी-एमएलए कोर्ट ने सभी 10 आरोपियों को दोषी माना और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई है. इस दौरान 900 से अधिक तारीखें पड़ी और करीब 72 गवाहों ने अपने बयान दर्ज कराये. दोषियों में कमलेश पाठक, उनके भाई संतोष पाठक, रामू पाठक सहित कुल 10 आरोपी शामिल हैं. इन सभी पर उम्रकैद के साथ-साथ 50-50 हजार रुपये का हर्जाना भी लगाया गया है.
ऐसे दोस्ती दुश्मनी में बदली
बताया जाता है कि इस दुश्मनी से पहले मंजुल चौबे और कमलेश पाठक के बीच काफी गहरी दोस्ती थी. लोग मंजुल चौबे को कमलेश पाठक की परछाई तक कहा करते थे. साल 2017 में भाजपा की सरकार आने के बाद मंजुल चौबे की राजनीतिक महत्वकांक्षा भी परवान चढ़ने लगी.
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उन्होंने सपा में मौजूद कमलेश पाठक का दामन छोड़कर बीजेपी नेताओं के करीब जाने लगीं. जबकि कमलेश पाठक समाजवादी पार्टी में ही रहे. इस राजनीतिक मतभेद और फिर जमीन के विवाद ने इस दोस्ती को दुश्मनी में बदल दिया. जो आगे चलकर एक खूनी खेल में तब्दील हो गया. आज कोर्ट ने सभी 10 आरोपियों को इस डबल मर्डर केस में दोषी माना है और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई है.
-भारत एक्सप्रेस
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