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‘वह राक्षस और राष्ट्रद्रोही हैं’, NEET प्रोटेस्ट पर महंत राजू दास का बयान वायरल

दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले Gen Z युवाओं पर अयोध्या हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास भड़क गए हैं. उन्होंने प्रदर्शनकारियों को ‘राक्षस’ बताते हुए उन पर भगवान राम और संतों के अपमान का आरोप लगाया है.

Mahant Raju Das Ayodhya

अयोध्या/मनमीत गुप्ता: नीट (NEET) पेपर लीक घोटाले के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर चल रहे युवाओं और छात्रों के प्रदर्शन पर अब एक नया और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. अयोध्या के हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास (Mahant Raju Das) ने इन प्रदर्शनकारी Gen Z (जेन-जी) युवाओं पर सीधा और बेहद तीखा हमला बोला है. उन्होंने इन छात्रों को ‘राष्ट्रद्रोही’ और ‘राक्षस’ करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) से इनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की अपील की है.

“ये मायावी राक्षस हैं, इनमें दया नहीं…”

महंत राजू दास ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए जंतर-मंतर पर हो रहे हुड़दंग की तीखी निंदा की. रामचरितमानस की चौपाई “कामरूप जनहिं सब माया. सपनेहुँ इन्ह के धरम न दाया॥” का जिक्र करते हुए उन्होंने प्रदर्शनकारियों को राक्षस बताया. उन्होंने कहा, “राक्षस कोई भी रूप धारण करने में निपुण होते हैं. इनमें दया और धर्म का लेश मात्र भी नहीं होता. छात्र के नाम पर ये लोग सिर्फ हुड़दंग कर रहे हैं.”

भगवान राम का अपमान

महंत ने आरोप लगाया कि इन तथाकथित छात्रों ने न सिर्फ निर्दोष पुलिसकर्मियों को पीटा है, बल्कि भगवान राम और संतों को भी बुरा-भला कहा है. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस और प्रशासन के अधिकारी तो सिर्फ कानून-व्यवस्था ठीक करने का काम कर रहे थे, ऐसे में उन अधिकारियों की क्या गलती थी? राजू दास ने सख्त लहजे में कहा कि भारत में ऐसे हिंसात्मक प्रदर्शनों की कोई जगह नहीं है, संतों ने कभी इस तरह का हिंसक प्रदर्शन नहीं किया.

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कार्यकर्ताओं को छूट मिले तो सिखाएं सबक

राजू दास का गुस्सा यहीं नहीं थमा. उन्होंने दूसरे पोस्ट में प्रदर्शनकारियों द्वारा पीएम मोदी और सरकार के खिलाफ इस्तेमाल किए गए अश्लील और अशोभनीय पोस्टरों की तस्वीरें भी साझा कीं. महंत ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शीर्ष नेतृत्व से खुली अपील करते हुए कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं को छूट दी जानी चाहिए ताकि वे इन अभद्र प्रदर्शनकारियों को सही सबक सिखा सकें. अब इस विवादित बयान के बाद छात्र आंदोलन की मर्यादा और धार्मिक नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाओं के बीच एक नई बहस छिड़ गई है.



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