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बस 10 दिन और फिर राम मंदिर ट्रस्ट में होने जा रहा है बड़ा उलटफेर? नृपेंद्र मिश्रा ने दिए ये संकेत

Ram Mandir Trust Meeting: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की कुल लागत 1600 से 1800 करोड़ रुपये के बीच रहने का अनुमान है. वहीं, मंदिर निर्माण समिति की बैठक में 100 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले भव्य राम कथा संग्रहालय की गैलरियों की स्क्रिप्ट को भी फाइनल कर दिया गया है.

AYODHYA Nripendra Mishra

Ram Mandir Trust Meeting: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण समिति की समीक्षा बैठक संपन्न हो गई है. समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी देते हुए राम कथा संग्रहालय के डिजिटल प्रारूप और मंदिर की कुल निर्माण लागत का खुलासा किया है.

राम मंदिर निर्माण समिति की बैठक में मंदिर की कुल लागत 1600 से 1800 करोड़ रुपये और राम कथा संग्रहालय के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट तय हुआ है. साथ ही 22 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में सीईओ की नियुक्ति और समितियों के भविष्य पर अंतिम फैसला लिया जाएगा.

करीब 100 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान (Ram Katha Museum Ayodhya)

राम मंदिर निर्माण समिति की बैठक के बाद अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि दो चरणों में हुई इस चर्चा में राम कथा संग्रहालय के स्वरूप और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को अंतिम रूप दिया गया है. इस अत्याधुनिक संग्रहालय की सभी गैलरियों की स्क्रिप्ट फाइनल हो चुकी है. इसके निर्माण पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जहां भगवान श्रीराम के वनगमन से जुड़ी देश की प्रमुख नदियों को प्रदर्शित किया जाएगा, जिसकी शुरुआत सरयू नदी से होकर समापन गुप्तार घाट पर होगा.

श्रद्धालुओं से संबंधित अफवाहों को खारिज किया (Ram Mandir visitors)

नृपेंद्र मिश्रा ने राम मंदिर निर्माण की कुल अनुमानित लागत साझा करते हुए बताया कि इसके 1600 से 1800 करोड़ रुपये के बीच रहने का अनुमान है. इसके साथ ही उन्होंने मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या कम होने की अफवाहों को सिरे से खारिज किया. उन्होंने कहा कि भक्तों की आमद में कोई कमी नहीं है और दर्शनार्थी पूरी आस्था के साथ आ रहे हैं, जिनसे संवाद के दौरान कोई शिकायत नहीं मिली है.

22 जुलाई को अहम बैठक प्रस्तावित (Ram Katha Museum Ayodhya)

आगामी 22 जुलाई को राम मंदिर ट्रस्ट की एक अहम बैठक प्रस्तावित है. इस बैठक में नए सीईओ की नियुक्ति, विभिन्न समितियों और उपसमितियों के भविष्य पर अंतिम फैसला लिया जाएगा. मिश्रा ने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट के पदेन सदस्यों को वोटिंग का अधिकार नहीं होता है और यदि सीईओ नियुक्त होते हैं, तो वह ट्रस्ट की निगरानी में अपना स्टाफ रखेंगे.

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-भारत एक्सप्रेस 



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