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बच्चों के वीडियो, डार्क वेब और 47 देश… बांदा में 10 साल तक होती रही 33 मासूमों से दरिंदगी, अदालत से पति-पत्नी को मौत की सजा

यूपी के बांदा में 10 साल तक 33 बच्चों का यौन शोषण होता रहा, एक दंपति ने उनके वीडियो डार्क वेब के जरिए 47 देशों में बेचे! अब POCSO कोर्ट ने पति-पत्नी को मौत की सजा सुनाई है. पढिए और समझिए कैसे हुआ दहला देने वाला कांड!

up Banda Child Exploitation

POCSO कोर्ट ने पति-पत्नी.. दोनों को मौत की सजा सुनाई

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

Banda Child Exploitation: यूपी के बांदा जिले में एक बेहद दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. यहां एक पति-पत्नी ने 10 साल तक 33 मासूम बच्चों का यौन शोषण किया. उनके वीडियो बनाए और डार्क वेब पर 47 देशों में बेचे. POCSO कोर्ट ने दोनों को मौत की सजा सुनाई है. कोर्ट में इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ केस माना गया है.

कैसे शुरू हुआ अपराध?

रामभवन (50 साल), जो सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर था, और उसकी पत्नी दुर्गावती (47 साल) ने 2010 से 2020 तक यह घिनौना काम किया. वे बच्चे चित्रकूट और बांदा इलाके के थे. कुछ बच्चे सिर्फ 3 साल के थे. आरोपी बच्चों को चॉकलेट, पैसे, मोबाइल गेम्स या गिफ्ट देकर लुभाते थे. फिर उन्हें किराए के कमरे में ले जाकर यौन शोषण करते थे. शोषण के दौरान मोबाइल और अन्य डिवाइस से वीडियो बनाते थे.

डार्क वेब पर वीडियो सप्लाई

शूट किए गए वीडियो और फोटो को डार्क वेब, एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर अपलोड किया जाता था. ये सामग्री 47 देशों जैसे अमेरिका, चीन, ब्राजील, अफगानिस्तान आदि में बेची जाती थी. जांच में 30 से ज्यादा वीडियो और सैकड़ों आपत्तिजनक फोटो बरामद हुए. कुल 2 लाख से ज्यादा ऐसी सामग्री मिली. बच्चों को ब्लैकमेल भी किया जाता था ताकि वे चुप रहें.

कैसे पकड़े गए आरोपी?

2020 में इंटरपोल ने चाइल्ड सेक्सुअल अब्यूज कंटेंट की निगरानी के दौरान संदिग्ध गतिविधि पकड़ी. तीन मोबाइल नंबर भारत से जुड़े मिले. इंटरपोल ने भारतीय एजेंसियों को सूचना दी. सीबीआई ने अक्टूबर 2020 में दिल्ली में केस दर्ज किया. छापेमारी में पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क से सबूत मिले. फरवरी 2021 में चार्जशीट दाखिल हुई. 74 गवाह थे. बच्चों को गंभीर चोटें आईं. कुछ के प्राइवेट पार्ट्स में घाव, आंखें टेढ़ी हो गईं. मानसिक सदमा भी बहुत गहरा था.

बांदा कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

बांदा की स्पेशल POCSO कोर्ट ने मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ बताया. कहा- सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है. दोनों को फांसी की सजा सुनाई. यूपी सरकार को हर पीड़ित बच्चे के लिए 10 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया. यह बांदा कोर्ट का हाल के महीनों में तीसरा मौत की सजा वाला फैसला है.

पीड़ितों की हालत अब कैसी?

बच्चों के बॉडी पार्ट्स डैमेज हुए हैं. कई अभी भी अस्पताल में हैं. परिवार सदमे में हैं. यह केस समाज को सोचने पर मजबूर करता है कि बच्चे कितने असुरक्षित हैं. पुलिस और कोर्ट ने तेज कार्रवाई की. लेकिन ऐसे अपराध रोकने के लिए समाज को जागरूक होना होगा.

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