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चंपत राय का इस्तीफा मंजूर होने पर भी ट्रस्ट में रहेंगे, जानिए क्या हैं राम मंदिर ट्रस्ट का नियम?

Ram mandir trust rules: राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे पर 6 जुलाई को फैसला होगा. जानिए ट्रस्ट के बायलॉज क्या कहते हैं और क्यों इस्तीफा मंजूर होने के बाद भी वे आजीवन ट्रस्टी बने रह सकते हैं.

Champat Rai Ram Mandir

Ram mandir trust rules: राम नगरी अयोध्या में चल रहे कथित चंदा चोरी के मामले में रोज एक नया मोड़ सामने आ रहा है. राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय (Champat Rai) और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा (Anil Mishra) ने 27 जून को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. हालांकि, उनके इस्तीफे पर अभी ट्रस्ट ने कोई फैसला नहीं लिया है. लेकिन इस बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि अगर इस्तीफा मंजूर होता है, तब भी चंपत राय और अनिल मिश्रा ट्रस्ट के आजीवन सदस्य बने रहेंगे. आइए जानते हैं, क्या कहता है ट्रस्ट का नियम.

क्या कहता है ट्रस्ट का नियम?

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नियमों के मुताबिक, अगर चंपत राय का महासचिव पद से इस्तीफा मंजूर भी हो जाता है, तब भी उनकी ट्रस्टी की सदस्यता खत्म नहीं होगी. ट्रस्ट के संविधान (बायलॉज)(Ram Mandir Trust Rules) में केवल किसी पदाधिकारी को उसके पद से हटाने या मुक्त करने का प्रावधान है, लेकिन इससे उसकी आजीवन ट्रस्टी सदस्यता पर कोई असर नहीं पड़ता. यानी पद छोड़ने के बाद भी चंपत राय ट्रस्ट के आजीवन सदस्य बने रह सकते हैं.

6 जुलाई को आएगा फैसला

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की त्रैमासिक बैठक 6 जुलाई को अयोध्या में होने जा रही है. राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ी के मामले के बाद यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है. इसी बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर फैसला लिया जाएगा. इससे पहले ट्रस्ट दोनों को कारण बताओ नोटिस जारी कर चुका है. बैठक में पहले दोनों पदाधिकारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा. उनके लिखित या मौखिक स्पष्टीकरण के बाद ही ट्रस्ट के सदस्य इस मामले पर विचार करेंगे.


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सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट के बायलॉज के अनुसार किसी पदाधिकारी का इस्तीफा स्वीकार करने के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है. उपविधियों में यह भी स्पष्ट है कि किसी भी पदाधिकारी के खिलाफ बिना स्पष्टीकरण लिए कार्रवाई नहीं की जा सकती. यदि ट्रस्ट महासचिव या किसी अन्य पद से हटाने का फैसला भी करता है, तब भी संबंधित व्यक्ति ट्रस्ट का आजीवन सदस्य बना रहेगा. फिलहाल ट्रस्ट में कुल 14 सदस्य हैं, लेकिन चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे के कारण इस मामले में बाकी 12 ट्रस्टियों की राय और मतदान अहम माना जा रहा है.

-भारत एक्सप्रेस



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