Bharat Express DD Free Dish

E20 के बाद अब E25-E30 पेट्रोल की तैयारी? जानिए आपकी कार पर क्या होगा असर

E20 Petrol Disadvantages: भारत में E20 पेट्रोल के बाद अब E25 और E30 ईंधन लाने की चर्चाएं तेज हैं. हालांकि इससे प्रदूषण और आयात बिल घटेगा, लेकिन 2023 से पहले की गाड़ियों के इंजन, माइलेज में होने वाली कमी और परफॉर्मेंस कारों के लिए हाई-ऑक्टेन फ्यूल की उपलब्धता को लेकर ऑटो जगत में बड़ी बहस छिड़ गई है.

Effect of ethanol on old cars

E20 Petrol Disadvantages: तनु चौधरी/दिल्ली: भारत में प्रदूषण कम करने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने के लिए इथेनॉल ब्लेंडिंग (Ethanol Blending) को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है. देश में E20 पेट्रोल लागू होने के बाद अब भविष्य के लिए E25 और E30 ईंधन पर मंथन शुरू हो चुका है. लेकिन इस बड़े बदलाव के बीच आम गाड़ी मालिकों और हाई-परफॉर्मेंस कार लवर्स के मन में कई सवाल हैं. जैसे कि उनकी पुरानी कारों का क्या होगा और क्या इससे माइलेज कम हो जाएगी? आइए विस्तार से समझते हैं.

भारत सरकार कच्चे तेल के आयात को कम करने के लिए पेट्रोल में इथेनॉल का मिश्रण (E20) बढ़ा रही है और भविष्य में E25 व E30 का लक्ष्य है. नई कारें तो E20 के अनुकूल हैं, लेकिन 2023 से पहले की गाड़ियों के लिए वाहन निर्माताओं की गाइडलाइन देखनी होगी. इथेनॉल के कारण माइलेज में थोड़ी गिरावट आ सकती है. इसके अलावा, हाई-परफॉर्मेंस टर्बो इंजनों को इंजन नॉकिंग से बचाने के लिए अधिक हाई-ऑक्टेन (RON 95+) ईंधन और भविष्य में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाना होगा.

कंपनी गाइडलाइंस जरूर चेक करें (High octane petrol India)

भारत में E20 के बाद अब E25 और E30 पेट्रोल लाने की तैयारी चल रही है, जिसका उद्देश्य कच्चे तेल का आयात घटाना और किसानों की आय बढ़ाना है. हालांकि, इस बदलाव से कार मालिकों के सामने कुछ बड़ी चुनौतियां होंगी. सबसे बड़ा सवाल 2023 से पहले बनी गाड़ियों का है, जो हाई-इथेनॉल मिश्रण के लिए डिजाइन नहीं हैं, इसलिए ऐसी कारों के मालिकों को कंपनी गाइडलाइंस जरूर चेक करनी चाहिए. इसके अलावा, इथेनॉल की कम ऊर्जा क्षमता (Energy Density) के कारण E20 या उससे ऊपर के ईंधन पर गाड़ियों के माइलेज में हल्की गिरावट आ सकती है.

वाहन तकनीक और हाई-ऑक्टेन इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड करना होगा (Effect of ethanol on old cars)

यह बदलाव हाई-परफॉर्मेंस और लग्जरी कारों के लिए भी मुश्किल खड़ी करेगा, क्योंकि आधुनिक टर्बोचार्ज्ड इंजनों को सुचारू रूप से चलने के लिए RON 95 या उससे अधिक हाई-ऑक्टेन फ्यूल की जरूरत होती है, कम ऑक्टेन मिलने पर इंजन नॉकिंग और पावर लॉस का खतरा बढ़ जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि E25 या E30 को पूरी तरह अपनाने के लिए इंजन तकनीक में बड़े बदलाव करने होंगे, जिससे देश में ‘फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों’ का चलन बढ़ेगा. फिलहाल इसकी कोई सख्त डेडलाइन तय नहीं है, लेकिन इस बदलाव को सफल बनाने के लिए वाहन तकनीक और हाई-ऑक्टेन इंफ्रास्ट्रक्चर दोनों को एक साथ अपग्रेड करना होगा.

यह भी पढ़ें:  रिहायशी इलाके में चल रहा था देह व्यापार का खेल! पुलिस के छापे से मचा हड़कंप, 5 लोग हिरासत में

-भारत एक्सप्रेस 



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read