ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर किसानों का प्रदर्शन
Greater Noida Authority Farmers Protest: ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर अपनी मांगों को लेकर किसानों ने आज फिर हल्ला बोल दिया. भारी संख्या में महिला किसान समेत सैकड़ों किसान प्राधिकरण पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया. इस दौरान किसानों ने प्राधिकरण में घुसने की कोशिश की, लेकिन पहले से ही तैनात जवानों ने उन्हें रोक लिया. इसी बीच किसान और जवानों के बीच तीखी धक्का-मुक्की भी देखने को मिली.
किसान लंबे समय से 10 प्रतिशत नई भूमि अधिग्रहण कानून समेत अपनी अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन करते आ रहे हैं. पिछले महीने किसानों ने अधिकारियों के आश्वासन के बाद अपना धरना स्थगित कर दिया था, लेकिन आज एक बार फिर किसानों ने प्राधिकरण पर धरना शुरू कर दिया है. इस धरने को लेकर किसानों ने पहले ही ऐलान कर दिया था.
बुधवार को हजारों किसान, किसान संघर्ष मोर्चा के बैनर तले जुटे. किसानों का कहना है कि जबतक 10 प्रतिशत विकसित भूखंड की मांग पूरा नहीं होता, किसान मोर्चे से वापस नहीं हटेंगे. उन्होंने कहा कि अब आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी.
किसानों की क्या है प्रमुख मांग?
प्रदर्शन कर रहे किसान मुख्यत: 4 प्रमुख मांगों के लिए सड़क पर उतरे हुए हैं. उनका कहना है कि 10 प्रतिशत विकसित भूखंड दिया जाए, गांवों की आबादियों का निस्तारण किया जाए, नए भूमि अधिग्रहण कानून के मुताबिक 20 प्रतिशत भूखंड और 20 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर का मुआवजा दिया जाए. किसानों का कहना है कि वो अपनी इन मांगों को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत हैं.
किसानों के इस प्रदर्शन को लेकर किसान एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोरेन प्रधान ने आर-पार की लड़ाई लड़ने की बात कही है. उन्होंने कहा कि यह चुनावी साल है. किसान अपने मुद्दों का समाधान करा कर ही दम लेंगे.
इसलिए आक्रोशित हो रहे किसान
इस प्रदर्शन को समर्थन दे रहे भारतीय किसान परिषद ने भी अपनी मौजूदगी जताई. परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर खलीफा का कहना है कि जिला प्रशासन और प्राधिकरण ने किसानों की मांग पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया. उस समय प्रशासन ने आश्वासन दिया था कि वो इस मामले को लेकर बातचीत करेंगे, लेकिन बैठक नहीं कराई गई. इसलिए किसानों में आक्रोश है.
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किसानों का कहना है कि वो पिछले 3 सालों से प्रदर्शन कर रहे हैं. समय-समय पर अपने मुद्दों को लेकर आंदोलन करते आए हैं. जिसके चलते मुआवजे में बढ़ोतरी जरूर हुई है लेकिन वह बाजार के दर से काफी क म है. इसलिए किसानों को नए कानून के मुताबिक मुआवजा दिया जाए.
-भारत एक्सप्रेस
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