दिव्य प्रेम सेवा मिशन, हरिद्वार के सेवा प्रकल्पों को समर्पित और छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित विश्व के सबसे बड़े ऐतिहासिक महानाट्य ‘जाणता राजा’ की गूंज ने दिल्ली-एनसीआर की सीमाओं को लांघकर पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग दिया है. ‘भारत एक्सप्रेस’ इस सात दिवसीय भव्य सांस्कृतिक व ऐतिहासिक महाआयोजन का आधिकारिक मीडिया पार्टनर है. 22 अक्टूबर से प्रारंभ हुआ यह महानाट्य आगामी 28 अक्टूबर तक निरंतर मंचित किया जा रहा है. सोमवार को जैसे ही गगनभेदी जयघोष ‘जय भवानी, जय शिवाजी’ गूंजा, पूरा सनसिटी परिसर असीम ऊर्जा और उत्साह से भर गया.
पांचवें दिन विशेष रूप से मेरठ, मुरादाबाद, हापुड़, संभल और अमरोहा के नागरिकों व युवाओं के लिए दिन तय किया गया था. अकेले मेरठ शहर से 60 से अधिक बसें स्कूली छात्र-छात्राओं और इंजीनियरिंग कॉलेज के युवाओं को लेकर सनसिटी पहुंचीं. दिव्य प्रेम सेवा मिशन के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. आशीष गौतम (भैया जी) के आह्वान पर जब हजारों दर्शकों ने अपने मोबाइल की टॉर्च जलाई, तो समूचा पंडाल जगमगा उठा. मंचासीन अतिथियों ने इतिहास का स्मरण करते हुए कहा कि 16वीं सदी के बाद छत्रपति शिवाजी महाराज के विचारों का सबसे सशक्त प्रभाव मेरठ में दिखा था, जिसके चलते 1857 की प्रथम स्वतंत्रता क्रांति की ज्वाला भी मेरठ की धरा से ही प्रस्फुटित हुई थी.
विनय सहस्त्रबुद्धे ने गिनाए ‘जाणता राजा’ देखने के 3 बड़े कारण
कार्यक्रम के पांचवें दिन मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे लेखक, विचारक और दिल्ली भाजपा के प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे ने दर्शकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज की पीढ़ी को यह महानाट्य क्यों देखना चाहिए, इसके तीन प्रमुख आधार हैं:
- राष्ट्र के प्रति शिवाजी महाराज का योगदान: मध्य एशिया और विदेशी आक्रांताओं ने सदियों के हमलों से भारतीय जनमानस का जो आत्मविश्वास तोड़ दिया था, उसे यदि किसी महापुरुष ने पुनर्जीवित किया तो वे छत्रपति शिवाजी महाराज थे.
- सुशासन का पाठ: शिवाजी महाराज ने तत्कालीन समय में जन-कल्याणकारी और सशक्त प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित कर सुशासन का वैश्विक मानक तय किया.
- कुशल राज्य व्यवस्था और स्वाभिमान: उन्होंने कूटनीति, रक्षा और जलसेना का गठन कर आत्मनिर्भर व स्वाभिमानी भारत की नींव रखी.
इस दौरान श्री सहस्त्रबुद्धे ने महाकवि भूषण की अमर पंक्तियों को उद्धृत कर पंडाल में रोमांच भर दिया:
“काशी कर्बला होती मथुरा मदीना होती, शिवाजी न होते तो सुन्नत होती सब की॥”
28 अक्टूबर को सभी के लिए ‘नो टिकट’, भोजन प्रसाद की भी व्यवस्था
‘जाणता राजा’ आयोजन समिति के संयोजक विनय चौधरी ने मंच से बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि 28 अक्टूबर यानी मंचन के अंतिम दिन किसी भी दर्शक को प्रवेशिका या पास की आवश्यकता नहीं होगी. यह महानाट्य सभी आम व खास नागरिकों के लिए पूरी तरह निःशुल्क (फ्री) रहेगा. साथ ही महामंचन के समापन के उपरांत सभी दर्शकों के लिए भव्य भोजन प्रसाद (भंडारे) की समुचित व्यवस्था की जाएगी.
उन्होंने बताया कि 27 अक्टूबर (मंगलवार) को बिजनौर, मुजफ्फरनगर, बागपत, सहारनपुर, देहरादून और पूरे उत्तराखंड के दर्शक महानाट्य का अवलोकन करेंगे.
चंडीघाट से शुरू हुआ सेवा का संकल्प आज 30 प्रकल्पों में वटवृक्ष
दिव्य प्रेम सेवा मिशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गौतम ने बताया कि 12 जनवरी 1997 को हरिद्वार के चंडीघाट में कुष्ठ रोगियों और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े वंचितों की सेवा से शुरू हुआ यह अनुष्ठान आज 30 से अधिक सेवा प्रकल्पों के रूप में चल रहा है. संस्था कुष्ठ रोगियों के बच्चों के लिए आधुनिक स्कूल, हॉस्टल और मेडिकल कॉलेज का सफल संचालन बिना किसी सरकारी सहायता के केवल समाज के सहयोग से कर रही है.
दिग्गज विभूतियों की रही गरिमामयी उपस्थिति
पांचवें दिन के सत्र में वृंदावन की साधिका साधना श्री, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक महेंद्र जी, मुकेश खांडेकर, राज्यसभा सांसद प्रकाश पाल, भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री हर्षवर्धन सिंह, वरिष्ठ पत्रकार व भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला, सुदर्शन न्यूज के प्रधान संपादक सुरेश चव्हाणके, मेरठ मंडल के प्रभारी डॉ. जगदीश सिंह चौहान, मुरादाबाद के प्रभारी चंद्रप्रकाश चौहान, ओमबीर सिंह, जसबीर सिंह, दिव्य प्रेम सेवा मिशन के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. संजय चतुर्वेदी, आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. राजेश गुप्ता, महामंत्री दीपक शर्मा, विजयराज सिंह, डॉ. अंकित शर्मा, राजेश कुमार सिंह, अभय कुमार पाल और अजय कुमार गुप्ता सहित हजारों गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे.
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