वाराणसी: धर्म नगरी काशी में आगामी 3, 4 और 5 नवंबर को तीन दिवसीय भव्य ‘संस्कृति संसद’ का आयोजन होने जा रहा है. इस सम्मेलन में देश भर से करीब 3,000 प्रमुख संत और 5,000 प्रबुद्ध युवा एक मंच पर जुटेंगे. संस्कृति संसद आयोजन समिति के अध्यक्ष और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय सचिव सुनील देवधर तथा अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने भारत एक्सप्रेस से खास बातचीत में इस विराट समागम की रूपरेखा साझा की.
सनातन विमर्श का महामंच बनेगी काशी
स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि कुंभ के बाद यह ऐसा अनूठा अवसर है जब इतनी बड़ी संख्या में संत समाज एकत्रित होकर हिंदू और सनातन धर्म से जुड़े ज्वलंत विषयों पर विचार-मंथन करेगा. उन्होंने दिल्ली में जंतर-मंतर पर हुए हालिया विरोध प्रदर्शनों पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि हिंदू त्योहारों के समय ही माहौल बिगाड़ने और अराजकता फैलाने का षड्यंत्र रचा जाता है. उन्होंने जंतर-मंतर पर जुटे युवाओं को निशाने पर लेते हुए कहा कि वे असली ‘जेन ज़ी’ नहीं हैं; सनातन धर्म का युवा राष्ट्र निर्माण और अपनी संस्कृति के संरक्षण के प्रति समर्पित है.
सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र चिंतन का संगम
सुनील देवधर ने बताया कि ‘संस्कृति संसद’ केवल एक वैचारिक गोष्ठी नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक गौरव और समसामयिक चुनौतियों पर मंथन का सशक्त मंच है. इस दौरान उन्होंने त्रिपुरा के एक युवक को सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर द्वारा अपमानित किए जाने की घटना की भी कड़ी निंदा की. 3 से 5 नवंबर तक चलने वाले इस त्रि-दिवसीय समागम में सामाजिक समरसता, धार्मिक संरक्षण और आधुनिक भारत में सनातन परंपरा की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर मंथन होगा.
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