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यूपी में इस बार कैसे चुनाव लड़ेगी बसपा? मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन अटकलों पर लगा दिया विराम, बोलीं- ‘बैसाखी का सहारा..’

यूपी की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी (BSP) की मुखिया मायावती ने साफ किया कि पार्टी इस विधानसभा चुनाव में अकेले ही मैदान में उतरेगी.

यूपी की राजनीति में फिर से हलचल बढ़ गई है. बहुजन समाज पार्टी (BSP) की मुखिया मायावती ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है जो पिछले कई दिनों से सियासी गलियारों में थीं. विधानसभा चुनाव में बसपा किसी भी बैसाखी का सहारा नहीं लेगी.

पिछले कुछ समय से चर्चा थी कि क्या बसपा इस बार अपनी रणनीति बदलेगी? क्या यूपी की सत्ता में वापसी के लिए वो किसी बड़े दल या क्षेत्रीय पार्टियों के साथ हाथ मिलाएगी? लेकिन मायावती ने कहा कि ‘बसपा का गठबंधन सिर्फ अपनी जनता और कार्यकर्ताओं से है, किसी राजनीतिक दल से नहीं.’ उन्होंने स्पष्ट किया कि बसपा उत्तर प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ने जा रही है. मायावती का यह रुख उन लोगों के लिए एक संदेश है जो मानकर चल रहे थे कि विपक्षी एकजुटता में बसपा भी एक अहम हिस्सा हो सकती है.

क्यों लिया अकेले लड़ने का फैसला?

मायावती का मानना है कि गठबंधन करने से पार्टी के वोट शेयर में तो शायद ही कोई बड़ा इजाफा हो, लेकिन कार्यकर्ताओं का मनोबल और पार्टी की मूल विचारधारा कहीं न कहीं दब जाती है. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने भरोसा जताया कि बसपा का जमीनी कार्यकर्ता “जी-जान” से तैयारी में जुटा हुआ है. उनका तर्क सीधा है कि जब बसपा अपने दम पर पूर्ण बहुमत की सरकार बना सकती है, तो फिर दूसरों के भरोसे क्यों रहना?

मैदान में उतरने की तैयारी तेज

मायावती ने सिर्फ एलान ही नहीं किया, बल्कि विरोधियों को चुनौती भी दे डाली. उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी छोटे-बड़े पदाधिकारी और कार्यकर्ता बूथ स्तर पर काम कर रहे हैं. इस बार का चुनाव बसपा के लिए साख की लड़ाई भी है, क्योंकि पिछले कुछ चुनावों के नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे हैं. ऐसे में मायावती का यह जुआ या तो मास्टरस्ट्रोक साबित होगा या फिर एक बड़ा रिस्क होगा.

आम जनता के लिए इसका क्या मतलब?

आम आदमी के नजरिए से देखें तो यूपी का मुकाबला अब पूरी तरह से मल्टी-कॉर्नर होने वाला है. एक तरफ भाजपा का मजबूत किला है, दूसरी तरफ सपा अपनी दावेदारी ठोक रही है, और अब बसपा ने अकेले उतरकर मुकाबले को और भी दिलचस्प बना दिया है. मायावती के इस फैसले से साफ है कि वो अपने कोर वोटर को यह समझाना चाहती हैं कि उनकी पार्टी आज भी उतनी ही मजबूत और स्वतंत्र है जितनी पहले थी.

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-भारत एक्सप्रेस



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