Naseemuddin Siddiqui joins SP: उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने अभी से सियासी तैयारियां तेज कर दी हैं. रविवार (15 फरवरी) को लखनऊ में हुई अहम बैठक के बाद पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ संकेत दिए कि सपा आगामी चुनाव पूरी ताकत के साथ लड़ेगी. इस दौरान विभिन्न दलों से आए कई नेताओं ने समाजवादी पार्टी को दामन थामा है, जिसे पार्टी ने PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम बताया है.
कांग्रेस छोड़ने के बाद नसीमुद्दीन सिद्दीकी सपा में शामिल हो गए हैं. उनके साथ अपना दल (सोनेलाल) के पूर्व विधायक राजकुमार पाल, अनीस अहमद उर्फ फूलबाबू, पूर्व विधायक दीनानाथ कुशवाहा और डॉ. दानिश खान (AIMIM के पूर्व प्रत्याशी, कांग्रेस से जुड़े रहे) ने भी सपा का दामन थामा.
कांग्रेस क्यों छोड़ा नसीमुद्दीन ने? (Why Naseemuddin Siddiqui left congress)
नसीमुद्दीन सिद्दीकी को उत्तर प्रदेश की राजनीति में कद्दावर मुस्लिम चेहरा माना जाता है. वे कांग्रेस में प्रांतीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे थे. 24 जनवरी को उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था. बताया जाता है कि हाल ही में राहुल गांधी के लखनऊ आगमन के दौरान एयरपोर्ट पर उन्हें रिसीव करने की अनुमति नहीं दी गई, जिससे वे नाराज हो गए और इसके बाद पार्टी छोड़ने का फैसला किया.
कौन हैं नसीमुद्दीन सिद्दीकी? (Who is Naseemuddin Siddiqui)
नसीमुद्दीन सिद्दीकी का लंबा राजनीतिक अनुभव रहा है. वे 1991 में पहली बार बांदा से विधायक चुने गए और बसपा के पहले मुस्लिम विधायक बने. 1995 में मायावती के मुख्यमंत्री बनने पर उन्हें एमएलसी बनाकर कैबिनेट मंत्री बनाया गया. 2007 से 2012 की बसपा सरकार में उनके पास 18 मंत्रालय थे और उन्हें ‘मिनी सीएम’ तक कहा जाता था.
2017 में बसपा से निष्कासन के बाद वे 2018 में कांग्रेस में शामिल हुए. 2019 में बिजनौर से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए. जनवरी 2026 में उन्होंने यह कहते हुए कांग्रेस छोड़ी कि आठ वर्षों में उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई.
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अखिलेश यादव का बयान
सपा प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने कहा कि नई जॉइनिंग से पीडीए और मजबूत होगा. उन्होंने ऐलान किया कि होली से पहले पीडीए का विशेष मिलन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि देश के नेता प्रतिपक्ष का अपमान हो रहा है. जो लोग दूसरों से प्रमाणपत्र मांगते हैं, उन्हें पहले अपना प्रमाणपत्र दिखाना चाहिए.
उन्होंने शंकराचार्य के मुद्दे पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि जो भी पीड़ित या अपमानित है, पीडीए उसके साथ खड़ा है. भारतीय संस्कृति में गेरुआ वस्त्र धारण करने वालों को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है और सपा इस परंपरा का सम्मान करती है.
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