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सामने कोचिंग सेंटर, सिर पर लटकती जर्जर इमारत… क्या नेहरू विहार में बड़े हादसे का इंतजार?

Nehru Vihar News: नेहरू विहार में एक झुकी हुई जर्जर इमारत पिछले तीन सालों से हादसों को न्योता दे रही है. सामने कोचिंग सेंटर में सैकड़ों छात्र पढ़ते हैं, लेकिन नगर निगम नोटिस चिपकाकर बेफिक्र बैठा है.

नेहरू विहार में झुकी हुई और जर्जर इमारत का दृश्य.

(PC: भारत एक्सप्रेस)

Nehru Vihar News:सेजल प्रजापति/दिल्ली: उत्तरी दिल्ली के नेहरू विहार में एक तिरछी और जर्जर इमारत राहगीरों और छात्रों के लिए काल बनकर खड़ी है. नगर निगम (MCD) ने करीब तीन साल पहले ही इसे खतरनाक (डेंजर) घोषित कर नोटिस चस्पा किया था, लेकिन तब से लेकर आज तक इसे गिराने की कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.

नेहरू विहार की झुकी इमारत को MCD ने 3 साल पहले डेंजर घोषित किया था. प्रशासनिक लापरवाही के कारण इसे अब तक ध्वस्त नहीं किया गया है. इमारत के सामने स्थित कोचिंग सेंटर के सैकड़ों छात्रों और स्थानीय लोगों पर हर वक्त जान का खतरा मंडरा रहा है.

इमारत को लेकर स्थानिय लोगों में डर

नेहरू विहार के घनी आबादी वाले इलाके में स्थित यह इमारत एक तरफ साफ तौर पर झुकी हुई नजर आ रही है. स्थानीय लोगों के लिए यह रोजाना का डर बन चुकी है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस जर्जर इमारत के ठीक सामने एक कोचिंग सेंटर संचालित हो रहा है, जहां हर रोज सैकड़ों छात्र पढ़ाई करने आते हैं. अगर इमारत का कोई भी हिस्सा अचानक गिरता है, तो इसकी चपेट में आकर कई जिंदगियां दांव पर लग सकती हैं.

नोटिस चस्पा करने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई ठंडे बस्ते में

क्षेत्रवासियों का कहना है कि तीन साल पहले जब MCD ने नोटिस लगाया था, तब उम्मीद जगी थी कि जल्द ही इस खतरे को हटा दिया जाएगा. लेकिन नोटिस चस्पा करने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई. लगातार शिकायतों और पत्राचार के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं. सत्य निकेतन जैसे पुराने हादसों से भी प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया है, जहां जर्जर इमारतें गिरने से मासूमों की जान चली गई थी.

लोगों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे

इलाके के लोगों का आरोप है कि नेहरू विहार में ऐसी कई पुरानी और असुरक्षित इमारतें हैं, जिनमें बिना किसी सुरक्षा मानक के कोचिंग संस्थान चलाए जा रहे हैं. नगर निगम सिर्फ कागजी खानापूर्ति और नोटिस चिपकाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता. सवाल यह है कि क्या अधिकारियों को किसी बड़े हादसे का इंतजार है, या फिर किसी बेकसूर की जान जाने के बाद ही नींद टूटेगी?

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-भारत एक्सप्रेस 



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