OP Rajbhar on Akhilesh Yadav: उत्तर प्रदेश की सियासत इस वक्त पूरी तरह से उबल रही है. बलिया में सुभासपा प्रमुख और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर (OP Rajbhar) को काले झंडे दिखाने और उनके खिलाफ ‘मुर्दाबाद’ के नारे लगने के बाद से ही ‘ट्विटर वॉर’ छिड़ा हुआ है. पिछले दिनों अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) को “सपाई गुंडों का इलाज योगी सरकार करेगी” की चेतावनी देने के बाद, अब राजभर ने एक और ‘विस्फोटक’ पोस्ट लिखकर सपा सरकार के दौरान हुए अपराधों की पूरी कच्ची चिट्ठी खोल दी है. उन्होंने अखिलेश को ‘एक जनपद-एक जातीय हिंसा’ का हिसाब देने की खुली चुनौती दी है.
याद दिलाया 2016 का बुलंदशहर कांड
ओपी राजभर ने अपने पोस्ट में अखिलेश यादव पर सीधा निशाना साधते हुए लिखा कि परसों आपके लोगों की गुंडई देखकर मुझे आपके पूरे मुख्यमंत्रित्व काल की सपाई गुंडागर्दी, अराजकता और आतंक का खौफनाक दौर याद आ गया. राजभर ने 2016 के बहुचर्चित बुलंदशहर नेशनल हाईवे कांड का जिक्र करते हुए लिखा कि कैसे एक मां और 14 साल की नाबालिग बेटी के साथ दरिंदगी हुई थी. राजभर ने सपा नेता आजम खान के उस समय के विवादित बयान की भी याद दिलाई और कहा कि अगर आप गलती से भी सत्ता में आ गए होते, तो ना जाने कितने बुलंदशहर कांड और हो चुके होते.
योगी सरकार ने गुंडों को ‘नर्कलोक’ पहुंचाया
राजभर ने अखिलेश को योगी सरकार के ‘एनकाउंटर’ मॉडल की याद दिलाते हुए लिखा कि सपा राज में भले ही पुलिस गुंडों के सामने सरेंडर कर देती थी, लेकिन 2020 में योगी सरकार ने बुलंदशहर कांड के मुख्य आरोपी को ठोक दिया. राजभर ने तल्ख लहजे में लिखा- “समझ रहे हैं, उन्हें कहां पहुंचा दिया? वहां जहां उनकी जगह थी… नर्कलोक!
बदायूं कांड और फिल्म ‘आर्टिकल 15’
हमला यहीं नहीं रुका. राजभर ने मई 2014 के बदायूं कांड का जिक्र किया, जहां दो दलित बहनों की हत्या कर शव पेड़ से लटका दिए गए थे. राजभर ने अखिलेश यादव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ज्यादातर आरोपी उनके ‘स्वजातीय’ थे और इस मामले को नॉर्मलाइज करने के लिए अभिनव सिन्हा से फिल्म ‘आर्टिकल 15’ (Article 15) बनवाई गई, ताकि पर्दे पर आरोपियों की जातियां बदली जा सकें.
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‘एक जनपद-एक जातीय हिंसा’ की चेतावनी
बलिया से शुरू हुई इस अदावत को राजभर अब आर-पार की लड़ाई में बदल चुके हैं. अपने पोस्ट के अंत में उन्होंने अखिलेश यादव को डंके की चोट पर खुली चुनौती देते हुए लिखा है- “तैयार रहिए अखिलेश जी! आपकी सरकार की ‘एक जनपद-एक जातीय हिंसा’ (यादव द्वारा) की याद आपको दिलाकर रहूंगा. आप लोगों ने हम पिछड़ों-दलितों पर क्या जुल्म ढाए थे, हमें सब याद है.” राजभर के इस सीधे और आक्रामक वार ने 2027 के चुनाव से पहले ही यूपी में जातीय और सियासी ध्रुवीकरण की सबसे बड़ी आग लगा दी है.
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