प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी (काशी) के बुनियादी ढांचे और यातायात व्यवस्था को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में मोदी सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में वाराणसी शहर को ट्रैफिक जाम की बड़ी समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए एक मेगा प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई. सरकार राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (एनएच-19) और वाराणसी रिंग रोड को गंगा नदी के किनारे से जोड़ने वाले एक बेहद आधुनिक लिंक कॉरिडोर का निर्माण करने जा रही है.
₹14,447 करोड़ की लागत, हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर होगा निर्माण
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल अनुमानित लागत 14,447.64 करोड़ रुपये तय की गई है. इसमें से 6,037.85 करोड़ रुपये शुद्ध सिविल निर्माण कार्य पर और 541.11 करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) पर खर्च किए जाएंगे. इस पूरे कॉरिडोर का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत किया जाएगा.
आधिकारिक बयान के अनुसार, यह कॉरिडोर लगभग 46.039 किलोमीटर लंबा होगा. इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें 6-लेन एलिवेटेड मुख्य मार्ग के साथ-साथ गंगा नदी पर एक बेहद आकर्षक और आइकॉनिक केबल-स्टे ब्रिज (Cable-Stayed Bridge) का निर्माण किया जाएगा. इसके अलावा एक्स्ट्राडोज्ड फुट ओवर ब्रिज-सह-प्रमुख पुल, लूप, रैंप, लिंक रोड और सर्विस रोड भी बनाए जाएंगे.
67% घट जाएगा यात्रा का समय, स्पीड होगी 80 से 100 किमी प्रति घंटा
इस हाई-स्पीड कॉरिडोर को 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के हिसाब से डिजाइन किया गया है. इसके पूरी तरह तैयार होने के बाद इस रूट पर औसत यात्रा का समय 60 मिनट से घटकर मात्र 20 मिनट रह जाएगा, यानी यात्रा के समय में करीब 67 प्रतिशत की भारी कमी आएगी. वहीं, एनएच-19 से काशी रेलवे स्टेशन तक पहुंचने में लगने वाला 50 मिनट का समय भी घटकर लगभग 25 मिनट हो जाएगा. इसके साथ ही, अत्यधिक व्यस्त लंका चौराहे पर जाम से राहत देने के लिए बीएचयू/लंका से सामने घाट तक एक एलिवेटेड स्पर (शाखा मार्ग) भी बनाया जाएगा.
पर्यटन, संस्कृति और लॉजिस्टिक्स को मिलेगा जबरदस्त बढ़ावा
वाराणसी में हर साल 15 करोड़ से अधिक पर्यटक और श्रद्धालु आते हैं. यह कॉरिडोर काशी विश्वनाथ मंदिर, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), नमो घाट, रामनगर किला और वाराणसी के प्रसिद्ध घाटों तक पहुंच को बेहद सुगम बना देगा. पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप तैयार यह प्रोजेक्ट लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, काशी रेलवे स्टेशन, बनारस रेलवे स्टेशन और रामनगर आईडब्ल्यूएआई पोर्ट सहित छह प्रमुख लॉजिस्टिक्स केंद्रों को आपस में जोड़ेगा.
इस परियोजना में आधुनिक इंजीनियरिंग का अनूठा प्रदर्शन देखने को मिलेगा, जिसमें गंगा नदी पर 910 मीटर लंबा केबल-स्टे ब्रिज और 1.32 किलोमीटर लंबा एक्स्ट्राडोज्ड फुट ओवर ब्रिज शामिल है, जिसमें श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ‘ट्रैवलेटर’ (चलायमान वॉकवे) लगाया जाएगा ताकि वे आसानी से बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर सकें. यह कॉरिडोर वाहनों की परिचालन लागत और प्रदूषण को कम करके वाराणसी और चंदौली के पूरे इलाके के सतत आर्थिक व सामाजिक विकास को एक नई गति देगा.
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