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प्रयागराज में प्राणिक हीलिंग वर्कशॉप का आयोजन, प्रतिभागियों को सिखाए गए ध्‍यान-योग के रहस्य

गेट वेल नाउ सेंटर ऑफ प्राणिक हीलिंग-प्रयागराज की ओर से अयोजित प्राणिक हीलिंग वर्कशॉप में प्रतिभागियों को जीवन के गहरे प्रश्नों जैसे “मैं कौन हूँ?”, “मैं कहाँ से आया हूँ?”, “मेरी आत्मा कहाँ है?”, और “मेरे जीवन का उद्देश्य क्या है?” के जवाब दिए गए.

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

Pranic Healing Workshop in Prayagraj: गेट वेल नाउ सेंटर ऑफ प्राणिक हीलिंग-प्रयागराज ने योग विद्या प्राणिक हीलिंग फाउंडेशन ट्रस्ट, वाराणसी के सहयोग से हाल ही में “उच्च आत्मा के साथ एकता प्राप्त करना” विषय पर एक प्राणिक हीलिंग वर्कशॉप का आयोजन किया. इस वर्कशॉप में दर्जनों प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिसमें कोलकाता की प्रसिद्ध प्रशिक्षक नेहा जैन मुख्य वक्ता थीं.

वर्कशॉप की मुख्य समन्वयक राखी गुप्ता ने कहा कि यह आयोजन आत्म-प्राप्ति और आध्यात्मिक विकास के लिए एक अनूठा अवसर प्रदान करता है.

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नेहा जैन ने अपने संबोधन में कहा कि उच्च आत्मा ईश्वर का वह दिव्य बीज है जो प्रत्येक व्यक्ति में मौजूद है. उन्होंने बताया कि उच्च आत्मा के साथ एकता प्राप्त करने से हम अपने सच्चे स्वरूप को जान सकते हैं, जो क्राइस्ट, बुद्ध, शिव या कृष्ण की प्रकृति के साथ एकरूप है. यह पाठ्यक्रम हमें आत्म-प्राप्ति, प्रबोधन और दिव्यता की सच्ची प्रकृति को समझने का मार्ग दिखाता है. आत्म-प्राप्ति के तीन चरणों की विस्तृत व्याख्या करते हुए, उन्होंने कहा कि पहला चरण यह समझना है कि हम आत्मा हैं- दिव्य बुद्धि, प्रेम और शक्ति का आध्यात्मिक प्राणी. दूसरा चरण ध्यान के दौरान आत्मा के रूप में स्वयं का अनुभव करना है, और तीसरा चरण अवतारी आत्मा का उच्च आत्मा के साथ मिलन है, जहां कोई अलगाव नहीं रहता.

ध्यान और आध्यात्मिक विकास

वर्कशॉप में प्रतिभागियों को दो शक्तिशाली ध्यान-शांति और ज्ञान के लिए ट्विन हृदय ध्यान और उच्च आत्मा के ऊपर ध्यान-सिखाए गए. इन ध्यानों के संयोजन से आध्यात्मिक साधक को दिव्य आनंद, प्रेम और प्रकाश का अनुभव होता है, जो तेजी से आध्यात्मिक विकास की ओर ले जाता है. राखी गुप्ता ने बताया कि इस पाठ्यक्रम में कई गूढ़ रहस्य उजागर किए गए, जैसे 12वें चक्र का स्थान, तीन चांदी की रस्सियों का रहस्य, और कुंडलिनी शक्ति को सुरक्षित रूप से जागृत करने की प्रक्रिया.

जीवन के गहरे प्रश्नों का उत्तर

वर्कशॉप में प्रतिभागियों को जीवन के गहरे प्रश्नों जैसे “मैं कौन हूँ?”, “मैं कहाँ से आया हूँ?”, “मेरी आत्मा कहाँ है?”, और “मेरे जीवन का उद्देश्य क्या है?” के उत्तर दिए गए. यह पाठ्यक्रम आध्यात्मिक साधकों को उनके सच्चे उद्देश्य और ईश्वर के साथ एकता का अनुभव कराता है. आशीष सिंह, प्रतिष्ठा सहाय, कुसुम जायसवाल और अनुभव दत्ता ने इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया.

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