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बाराबंकी में सरयू नदी के कटान की चपेट में प्रचीन मंदिर, CM योगी ने बचाने के लिए दिए सख्त निर्देश

बाराबंकी के हेतमापुर में सरयू नदी के कटान से तीन ऐतिहासिक मंदिर खतरे में आ गए हैं. सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर डीएम-एसपी ने मौके पर पहुंचकर कटान रोधी कार्य तेज कराए हैं.

Saryu River Erosion Threatens Barabanki Ancient Temples CM Yogi Orders Urgent Action Bharat Express

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में सरयू नदी का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है. जलस्तर घटने के साथ ही नदी की तेज धार ने किनारों को तेजी से काटना शुरू कर दिया है. रामनगर तहसील के हेतमापुर गांव में स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अब करीब 20 साल बाद सरयू का रुख इस तरफ मुड़ा है. मकानों और सरकारी इमारतों को निगलने के बाद अब नदी का पानी क्षेत्र के तीन अति-प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिरों के बेहद करीब पहुंच गया है.

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्थानीय प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इन स्थलों को किसी भी कीमत पर कटान से बचाया जाए.

दिन-रात चलेगा बचाव कार्य

मुख्यमंत्री के आदेश के तुरंत बाद जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह और पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय बाढ़ खंड के अधिकारियों के साथ हेतमापुर पहुंचे. अधिकारियों ने मौके का जायजा लिया और बाढ़ नियंत्रण विभाग को दिन-रात काम करने के निर्देश दिए.

कटान को रोकने के लिए पोकलैंड मशीनों की मदद ली जा रही है. नदी के बहाव को मोड़ने और कटान की रफ्तार धीमी करने के लिए पास के खाली पड़े ढांचों को गिराकर जिओ-बैग्स और टोकर (Spurs) तैयार किए जा रहे हैं.

किन धार्मिक स्थलों पर मंडरा रहा खतरा?

सरयू की कटान की चपेट में बाबा नारायण दास की तपोस्थली व समाधि स्थल, प्राचीन शंकर जी मंदिर और महंत गुरु नारायण मंदिर आ चुके हैं. स्थानीय निवासियों के मुताबिक, इन स्थलों से बाराबंकी ही नहीं बल्कि आसपास के कई जिलों के श्रद्धालुओं की गहरी आस्था जुड़ी हुई है.

पिछले दस दिनों में नदी पहले ही एक टेलीफोन एक्सचेंज, एक हनुमान मंदिर और लगभग 25 ग्रामीणों के मकानों को अपनी आगोश में ले चुकी है.

पीड़ितों के लिए आवास का ऐलान

तबाही के डर से कई ग्रामीण खुद अपने हाथों से अपने आशियाने तोड़कर मलबा सुरक्षित जगहों पर ले जाने को मजबूर हैं. जिलाधिकारी ने भरोसा दिलाया है कि जिन लोगों के घर नदी में बह गए हैं, उन्हें प्रशासन आवासीय पट्टे आवंटित करेगा. साथ ही, पीड़ितों को मुआवजा और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान भी मुहैया कराए जाएंगे.

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-भारत एक्सप्रेस



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