Varanasi Taksal Shootout Abhay Singh
Varanasi Taksal Shootout Abhay Singh: उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, उससे पहले ही पूर्वांचल में बाहुबल की तपीश बढ़ने लगी है. वाराणसी के टकसाल फायरिंग मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. इस मामले में आरोपी रहे सपा के बागी और अयोध्या गोसाईगंज से विधायक अभय सिंह, मिर्जापुर के बाहुबली MLC विनीत सिंह सहित कुल 6 आरोपियों को कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया. इन सभी को जौनपुर के बाहुबली धनंजय सिंह पर साल 2002 में फायरिंग मामले में आरोपी बनाया गया था.
वाराणसी के टकसाल सिनेमा के पास साल 2002 में जौनपुर के बाहुबली धनंजय सिंह पर फायरिंग हुई थी. जिसके बाद धनंजय सिंह और अभय सिंह के बीच दुश्मनी की वो दीवार खड़ी हो गई, जो आजतक चल रही है. जिस समय हमला हुआ था उस समय धनंजय सिंह जौनपुर के रारी विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक थे.
क्या है पूरा मामला?
एक इंटरव्यू में धनंजय सिंह बताते हैं कि वो 4 अक्टूबर 2002 को वाराणसी के नदेसर इलाके से अपने काफिले के साथ गुजर रहे थे. जब उनका काफिला टकसाल सीनेमा के पास पहुंचा तो वहां पहले से ही घात लगाए अपराधियों ने उनकी गाड़ी पर AK-47 से हमला कर दिया. कई मिनटों तक उन्होंने धनंजय सिंह के काफिले पर अंधाधुंध फायरिंग की थी. यह हमला वाराणसी के इतिहास में पहली बार हुआ था, जब किसी पर AK47 से ओपन फायरिंग की गई.
धनंजय सिंह के काफिले पर हुई फायरिंग का उनके लोगों ने भी जबरदस्त जवाब दिया. इस अंधाधुंध फायरिंग में धनंजय सिंह बच गए, लेकिन उनके कई समर्थक गंभीर रूप से घायल हुए थे.
इस मामले में धनंजय सिंह ने कुल 6 लोगों को आरोपी बनाया था, जिसमें अयोध्या के बाहुबली विधायक अभय सिंह, मिर्जापुर के बाहुबली MLC विनीत सिंह भी शामिल थे.
अभय सिंह ने क्या कहा?
कोर्ट के द्वारा फैसला सुनाये जाने के बाद अभय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर धनंजय सिंह पर जबरदस्त हमला बोला. उन्होंने कहा कि धनंजय सिंह घोषित अपराधी हैं. अभय सिंह आगे कहते हैं कि जिस मुकदमें में मैं 54 महीने जेल में था उसमें ये भी आरोपी रहे. अपराध धनंजय सिंह करते थे मैं जेल में चला जाता था.
उन्होंने कहा कि न्याय की जीत हुई है. 24 साल पहले उनपर फर्जी मुकदमा कराया गया था. यह हमला खुद धनंजय सिंह ने अपने ऊपर कराया था, ताकि उनकी सुरक्षा बढ़ जाए.
अभय सिंह ने इस दौरान धनंजय सिंह पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि धनंजय सिंह बेहद ही शातिर अपराधी हैं. वो बिना अपराध के रह नहीं सकते. सरकारी सुरक्षा में वसूली करना और जघन्य अपराधों को अंजाम देना उनका मुख्य पेशा है.
कभी दोस्त थे अब क्यों हो गए दुश्मन?
धनंजय सिंह और अभय सिंह लखनऊ विश्वविद्यालय में दोस्त थे. कई मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि विश्वविद्यालय में पढ़ने के दौरान ही दोनों ने मिलकर वहां जबरदस्त वर्चस्व कायम किया और ठेका-टेंडर दिलाने लगे. इसी बीच दोनों में किसी बात को लेकर ठन गई जो वर्चस्व की लड़ाई में बदल गई.
साल 2002 में हुआ टकसाल शूटआउट ने पूर्वांचल में माफियाओं और बाहुबलियों के कॉकटेल को राष्ट्रीय स्तर पर उजागर कर दिया. कभी जिगरी दोस्त रहे दोनों बाहुबलियों की आपसी अदावत गैंगवार में बदल गई. जिसका असर पूर्वांचल से लेकर लखनऊ तक महसूस किया गया.
-भारत एक्सप्रेस
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