सरहदों पर बहुत तनाव है क्या, कुछ पता करो चुनाव है क्या? मशहूर दिवंगत शायर राहत इंदौरी साहब के इस शेर में सरहदों की जगह उत्तर प्रदेश लिख दिया जाए तो यह आज के माहौल पर एकदम फिट बैठ जाता है. यूपी में पंचायत चुनाव की उल्टी गिनती शुरू होते ही सूबे में एक बार फिर राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है. योगी आदित्यनाथ सरकार इस समय दो अति संवेदनशील घटनाओं को लेकर विपक्ष के निशाने पर है.
प्रयागराज में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद और नोएडा में इंजीनियर युवक की डूबने से हुई मौत ने योगी सरकार को बैकफुट पर ला दिया है. विपक्ष लगातार सरकार से सवाल कर रहा है. इन सवालों ने ना सिर्फ सरकार बल्कि बीजेपी के अंदर भी खलबली मचा दी है.
धर्म के सवाल पर डरी बीजेपी
दोनों मामलों को लेकर बीजेपी के अंदर ही घमासान मचा हुआ है. पार्टी के अंदरखाने बातें चल रही हैं कि जिस तरह से इन मामलों को हैंडल किया गया, उससे पार्टी की छवि को ही नुकसान पहुंचा है. प्रयागराज वाले मामले पर जहां बीजेपी के हिंदुत्व की छवि को नुकसान पहुंचा है. तो वहीं नोएडा वाले मामले पर शहरी वोटरों में डर और गुस्सा साफ देखा जा सकता है. इन घटनाओं के आधार पर विपक्ष को सरकार पर हमले करने का मौका मिल गया है.
प्रयागराज मामले पर क्या हुआ?
माघ मेले के दौरान प्रयागराज में अपनी पालकी से गंगास्नान के लिए निकले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को रोके जाने और उनके शिष्यों को हिरासत में लेकर पीटने के मामले में विपक्ष लगातार हमलावर है. विपक्ष ने बीजेपी के राज में हिंदुओं और संतों का सम्मान नहीं करने का आरोप लगाया है. वहीं इस मामले पर संत समाज में भी यूपी सरकार के खिलाफ गुस्सा है. पुरी से लेकर द्वारका तक के शंकराचार्यों ने योगी सरकार की आलोचना की है. प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई उचित थी नहीं तो भगदड़ मच सकती थी.
नोएडा में सरकारी मिशनरियों की विफलता!
गौतमबुद्ध नगर के नोएडा सेक्टर 150 में बिल्डर के खोदे गड्ढे में डूबकर इंजीनियर युवराज की मौत हो गई. युवराज की मौत के दौरान वहां पर पुलिस, एसडीआरएफ और दमकलकर्मी तक मौजूद थे. तमाम व्यवस्थाओं के बावजूद युवराज को बचाया नहीं जा सका. जिसे सरकार की बड़ी विफलता के तौर पर देखा जा रहा है.
बीजेपी के नेताओं ने इस संबंध में कहा है कि नोएडा जैसे विकसित शहर में अगर ऐसा मामला हो रहा है तो छोटे शहरों की स्थिति क्या होगी. इसपर जनता लगातार बात कर रही है जो बीजेपी के लिए चिंताजनक है.
हालांकि नोएडा मामले में सरकार ने एसआईटी का गठन किया है और बिल्डर को गिरफ्तार कर लिया गया है. वहीं नोएडा के सीईओ को भी पद से हटा दिया गया है.
सीएम योगी ने कहा कालनेमी
यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने अविमुक्तेश्वरानंद का बिना नाम लेकर हमला करते हुए कहा कि सनातन में पहले भी कालनेमी मौजूद थे. सनातन को कमजोर करने वाले इन कालनेमियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
वहीं दूसरी तरफ यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने इस मामले पर योगी से अलग रुख रखा. उन्होंने कहा कि इस मामले में दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. इस घटना को उन्होंने दुखद बताया.
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विपक्ष लगातार हमलावर
दोनों मामलों को लेकर अब बीजेपी पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस हमलावर है. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी ने सनातन का हमेशा अपमान किया है. अविमुक्तेश्वरानंद के साथ बीजेपी सरकार का यह रवैया नया नहीं है. वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भी बीजेपी सरकार पर बड़ा हमला बोला. वो प्रयागराज गए और अविमुक्तेश्वरानंद को अपना समर्थन दिया.
गौरतलब है कि 2026 का साल बीजेपी के लिए काफी अहम है. इसी साल यूपी में पंचायत चुनाव होने हैं. जिसमें बीजेपी की ग्राउंड पर पकड़ कितनी है उसकी परीक्षा होगी. वहीं अगले साल 2027 में यूपी विधानसभा चुनाव होने हैं. जो यूपी की योगी सरकार के लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं होने वाला. पार्टी के नेताओं को डर है कि अगर धर्म और शहरी मतदाताओं के बीच बीजेपी पिछड़ती है तो वह उसके लिए सही नहीं होगा.
-भारत एक्सप्रेस
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