उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने दिव्यांग बच्चों की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई और उनके उज्ज्वल भविष्य को लेकर एक बेहद सराहनीय पहल की है. सरकार ने राज्य के बचे हुए जिलों में 28 नए ‘बचपन डे केयर सेंटर’ खोलने की मंजूरी दे दी है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य 3 से 7 साल तक के छोटे दिव्यांग बच्चों को कम उम्र से ही पढ़ाई की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें आगे की स्कूल की पढ़ाई के लिए पूरी तरह तैयार करना है.
फिलहाल कितने केंद्र?
मौजूदा समय में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में 25 बचपन डे केयर सेंटर बहुत अच्छे से चल रहे हैं. इन सभी केंद्रों की कुल क्षमता करीब 1,490 बच्चों की है, जिनमें इस वक्त 1,463 बच्चे पढ़ाई और स्पेशल ट्रेनिंग ले रहे हैं. यानी देखा जाए तो इन सेंटर्स में लगभग 98 प्रतिशत सीटों पर बच्चे पहले से ही नामांकित हैं. इन बच्चों में 465 बच्चे सुनने में असमर्थ, 342 दृष्टिबाधित, 520 बौद्धिक रूप से दिव्यांग और 136 लर्निंग डिसेबिलिटी (सीखने की क्षमता में कमजोरी) वाले शामिल हैं. इन सभी को इनकी खास जरूरतों के हिसाब से शिक्षा और माहौल दिया जा रहा है.
कहां-कहां चल रहे हैं सेंटर?
अभी तक यह सेंटर लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर, आगरा, मेरठ, गोरखपुर और अयोध्या जैसे 18 मंडलीय जिलों के साथ-साथ चंदौली, बहराइच, सोनभद्र और चित्रकूट जैसे 7 आकांक्षी जिलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अब वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान उन जिलों में भी 28 नए सेंटर खोले जाएंगे जहां ये सुविधा अभी तक नहीं पहुंच पाई थी.
इसके अलावा, इन सभी केंद्रों के कामकाज और बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए इन्हें ‘आईएसओ प्रमाणन’ (ISO Certification) भी मिल चुका है, जो इनकी बेहतरीन कार्यप्रणाली को दर्शाता है. सरकार का यह कदम साफ तौर पर यह बताता है कि समाज के इन विशेष बच्चों को आगे बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशासन पूरी तरह से प्रतिबद्ध है.
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-भारत एक्सप्रेस
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