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जब चंद्रशेखर संग हेलिकॉप्टर से लगाया गांव का चक्कर, जानिए जेपी के सिताब दियारा से आखिरी सफर की कहानी

Jayaprakash Narayan Death Anniversary: संपूर्ण क्रांति के नायक जेपी की आज पुण्यतिथि है. 1978 में जब वे अंतिम बार अपने गांव सिताब दियारा आए थे, तो विदाई के वक्त पूरा गांव और खुद जेपी भावुक हो उठे थे.

संपूर्ण क्रांति के नायक लोकनायक जयप्रकाश नारायण को उनकी पुण्यतिथि पर नमन.

Jayaprakash Narayan Death Anniversary:धर्मेंद्र रस्तोगी: संपूर्ण क्रांति के प्रणेता और लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) की आज पुण्यतिथि है. 1974 में अपने आहान से केंद्र सरकार की नीव हिला देने वाले जेपी का 8 अक्टूबर 1979 को पटना में निधन हो गया था. जब उनके निधन की खबर उनके पैतृक गांव सारण के सिताब दियारा पहुंची, तो पूरा गांव फफक-फफक कर रो पड़ा था.

लोकनायक जयप्रकाश नारायण का निधन 8 अक्टूबर 1979 को हुआ था, लेकिन उनकी यादें आज भी उनके पैतृक गांव सिताब दियारा में जिंदा हैं. 1978 में अपनी अंतिम गांव यात्रा के दौरान उन्होंने चंद्रशेखर जी के साथ हेलिकॉप्टर से पूरे गांव का चक्कर लगाकर अपने घर को अंतिम बार निहारा था. जेपी के विचार आज भी प्रासंगिक हैं, भले ही उनके नाम पर राजनीति करने वालों के बीच उनका अपना गांव आज भी अपेक्षित विकास की राह देख रहा है.

सिताब दियारा से जेपी का अटूट नाता

Jayaprakash Narayan

लोकनायक जयप्रकाश नारायण का जन्म 11 अक्टूबर 1902 को सारण जिले के रिविलगंज प्रखंड स्थित सिताब दियारा (लाला टोला) में हुआ था. बचपन में प्लेग की बीमारी और सरयू नदी के कटाव के कारण उनका परिवार यूपी सीमा से सटे जयप्रकाश नगर में बस गया. 8 अक्टूबर 1979 को जब पटना में उन्होंने अंतिम सांस ली, तो खबर मिलते ही सिताब दियारा का कोना-कोना रो पड़ा था. कई लोग तो तुरंत उनके अंतिम संस्कार के लिए पटना रवाना हो गए थे.

सितंबर 1978: गांव की अंतिम और भावुक यात्रा

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गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि जेपी अंतिम बार 7 सितंबर 1978 को अपने घर आए थे और वहां तीन दिन रुके थे. दलजीत टोला के बुजुर्ग आनंद बिहारी सिंह उस यात्रा को याद करते हुए बताते हैं कि जब आंगन में बैठी गांव की महिलाएं संकोच में जेपी के पैर छूने लगीं, तो जेपी ने मुस्कुराकर भोजपुरी में कहा, “आपलोगन के हमार पैर ना छूए के चाही.’ इस पर एक बुजुर्ग महिला ने कहा, ‘राउर इ नातिन पतोह लगिहें.” यह सुनकर जेपी मुस्कुरा दिए और सभी को आशीर्वाद दिया.

हेलिकॉप्टर से गांव को अंतिम निहारना

उस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी भी हर पल उनके साथ थे. विदाई के वक्त जेपी ने कहा, ‘चंद्रशेखर, तनी हमार गांव दिखा द.’ इसके बाद वे चंद्रशेखर को हेलिकॉप्टर में बैठाकर पूरे सिताब दियारा के दो चक्कर लगाए. नीचे खड़ी भीड़ ‘लोकनायक जिंदाबाद’ के नारे लगा रही थी. हेलिकॉप्टर जब नीचे उतरा तो जेपी कुछ देर खड़े होकर अपने घर को निहारते रहे. वह विदाई का पल गांव वालों और जेपी दोनों के लिए बेहद असहनीय था.

विचारधारा अमर, लेकिन विकास का इंतजार

जेपी की राजनीतिक विचारधारा आज भी देश को प्रेरित करती है. हालांकि, उनके नाम पर राजनीति करने वाले कई नेता सत्ता के शिखर तक पहुंचे, लेकिन उनका अपना गांव सिताब दियारा आज भी उतने विकास का इंतजार कर रहा है जिसका वह हकदार था. पुण्यतिथि पर जेपी नारायण स्मारक प्रतिष्ठान में स्कूली बच्चे और ग्रामीण उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि देंगे.

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-भारत एक्सप्रेस



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