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Jayaprakash Narayan

लोकनायक जयप्रकाश नारायण भारतीय राजनीति के ऐसे जननेता थे, जिन्होंने अपने विचारों और संघर्षों से देश की कई पीढ़ियों को प्रभावित किया. उनके लिए आजादी का मतलब केवल अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति पाना नहीं था, बल्कि हर नागरिक को सम्मान, न्याय और अपने अधिकारों के साथ जीने का अवसर देना भी था.

Jayaprakash Narayan Death Anniversary: संपूर्ण क्रांति के नायक जेपी की आज पुण्यतिथि है. 1978 में जब वे अंतिम बार अपने गांव सिताब दियारा आए थे, तो विदाई के वक्त पूरा गांव और खुद जेपी भावुक हो उठे थे.

8 अप्रैल 1974 का दिन भारतीय राजनीति में अहिंसक संकल्प का प्रतीक है. सुप्रसिद्ध इतिहासकार बिमल प्रसाद और सुजाता प्रसाद की पुस्तक 'क्रांति का सपना' (वाणी प्रकाशन) जेपी के उस मौन जुलूस की याद दिलाती है.

11 अक्टूबर को जयप्रकाश नारायण की जयंती पर देश उन्हें संपूर्ण क्रांति, लोकतंत्र की रक्षा और सत्ता से दूर रहकर जनसेवा के प्रतीक के रूप में याद कर रहा है. जानिए उनके संघर्षों और विचारों की कहानी.

JP के नाम से मशहूर जयप्रकाश नारायण (Jayaprakash Narayan) को सविनय अवज्ञा आंदोलन में उनकी सक्रिय भागीदारी के लिए उन्हें अंग्रेजी हुकूमत ने गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था.

1952 के लोकसभा चुनावों में अपनी भारी जीत के बाद जवाहर लाल नेहरू ने जेपी को अपने डिप्टी के रूप में अपनी सरकार में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया था.

समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण की जयंती मनाने के लिए अखिलेश यादव गुरुवार रात जेपी सेंटर गए थे. वह यहां लगी उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण करना चाहते थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें जाने की इजाजत नहीं दी.