Asif Ali Zardari
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने दावा किया है. स्वतंत्रता दिवस के एक कार्यक्रम में जरदारी ने कहा कि पाकिस्तान के हिंदू भारत के हिंदुओं से ज्यादा खुश हैं. उनका कहना था कि पाकिस्तान के मुसलमान सहिष्णु हैं और हिंदू समुदाय को पूरी आजादी हासिल है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत ‘अखंड भारत’ में विश्वास रखता है, जबकि पाकिस्तान की सोच अलग है.
जरदारी ने दावा किया कि पाकिस्तान में करीब 4 फीसदी हिंदू आबादी रहती है और ये लोग भारत जाने के बजाय पाकिस्तान में रहना पसंद करेंगे. लेकिन उनके इस बयान पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं.
जमीनी तस्वीर बिलकुल अलग
संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने अप्रैल 2026 में पाकिस्तान में महिलाओं और लड़कियों के अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन के मामलों पर चिंता जताई थी. रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में जबरन धर्म परिवर्तन के जरिए कराई गई शादियों से प्रभावित महिलाओं और लड़कियों में करीब 75 फीसदी हिंदू थीं. इनमें बड़ी संख्या किशोरियों की थी और करीब 80 फीसदी मामले सिंध प्रांत से सामने आए. विशेषज्ञों ने कहा कि पीड़ितों को हिंसा, शोषण और सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ता है.
संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञ पहले भी कह चुके हैं कि हिंदू और ईसाई लड़कियां अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और कम उम्र में शादी के लिए असुरक्षित हैं. कुछ मामलों में पुलिस पर शिकायत दर्ज न करने और अदालतों में पीड़िताओं की सुरक्षा सुनिश्चित न होने को लेकर भी सवाल उठे हैं.
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आबादी के आंकड़े भी जरदारी के दावे से अलग हैं
पाकिस्तान की 2023 की जनगणना के अनुसार, हिंदुओं की संख्या करीब 52 लाख है, जो कुल आबादी का लगभग 2.17 फीसदी है. सिर्फ हिंदू ‘जति’ आबादी को देखें तो यह करीब 1.61 फीसदी बैठती है. यानी जरदारी का चार फीसदी वाला आंकड़ा जनगणना से मेल नहीं खाता.
ऐसे में जरदारी का बयान राजनीतिक तौर पर चाहे जो संदेश देता हो, लेकिन उपलब्ध आंकड़े और संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टें पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर एक जटिल तस्वीर सामने रखती हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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