Pakistan Government Crisis: पाकिस्तान सत्ता के इतिहास के पन्ने टटोले तो एक बात साफ नजर आती है, यहां के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ ने भारत के साथ हुई हर बड़ी जंग के बाद सत्ता पर कब्जा जमाया है. पाकिस्तान में आर्मी के पास शहरों की पुलिस तक की ताकत है. मौजूदा आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर (Asim Munir) भी अब तानाशाही की राह पर बढ़ते नजर आ रहे हैं. पहले उनका फील्ड मार्शल बनाया जाना और फिर संविधान संशोधन के जरिए उन्हें चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) नियुक्त करना इसी ओर इशारा करता है.
पाकिस्तान में कब-कब हुआ तानशाहों का कब्जा
भारत-पाकिस्तान युद्धों के इतिहास को देखें तो हर जंग के बाद पाकिस्तान में तानाशाह शासन उभरता रहा है. 1971 के भारत-पाकिस्तान जंग के बाद जनरल जिया-उल-हक ने जुल्फिकार अली भुट्टो की सत्ता पर कब्जा कर लिया था. कारगिल युद्ध के बाद जनरल परवेज मुशर्रफ ने भी तख्तापलट कर सत्ता हथिला ली थी, और अब ऑपरेशन सिंदूर के बाद आसिम मुनीर के तानाशाह बनने की राह साफ दिखने लगी है. यह कदम तब और मजबूत हुआ जब पाकिस्तान के संविधान में संशोधन कर उन्हें CDF बना दिया गया. इसका मतलब है कि अब पाकिस्तान की थल सेना, वायु सेना और नौसेना, तीनों उन्हीं के इशारों पर काम करेंगी.
सरकार से मुनीर को मिली ताकत
एक हफ्ते तक चली राजनीतिक चर्चाओं के बाद पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ जरदारी ने जनरल आसिम मुनीर को पाँच साल के लिए पहले चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) के रूप में नियुक्त कर दिया. विपक्ष के विरोध के बावजूद संविधान में किए गए संशोधन से इस नए पद का गठन हुआ. इससे उनकी ताकत कई गुना बढ़ गई है. खास बात यह है कि अब परमाणु हथियारों का कंट्रोल अब सीधे मुनीर के पास चला गया है. यह कहीं ना कहीं क्षेत्र के दूसरे देशों खासतौर से भारत के लिए चिंता का विषय बन सकात है. CDF बनने के साथ ही असीम मुनीर देश के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति बन गए हैं. इस नए पद के साथ उन्हें राष्ट्रपति की तरह उनको किसी भी कानूनी मुकदमे से आजीवन छूट मिलेगी.
ये भी पढ़ें: ‘चुनाव संभव नहीं’, बांग्लादेश इलेक्शन पर बवाल, मो. यूनुस पर फूट पड़ी आवामी लीग
असीम मुनीर को मिली इतनी शक्तियों के बाद यह अटकलें तेज हो गई हैं कि पाकिस्तान में एक बार फिर नागरिक सरकार पर सेना का दबदबा बढ़ सकता है. हालांकि यह भी सच है कि इतनी ताकतें खुद नागरिक सरकार ने ही मुनीर को सौंपी हैं. लेकिन अब बड़ा सवाल यह है कि, मुनीक के CDF बनते ही क्या प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की कुर्सी खतरे में है औरक्या पाकिस्तान एक बार फिर अपना इतिहास दोहराने जा रहा है.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

