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China-PAK की जमात में बांग्लादेश: China-South Asia Cooperation Forum से इतर तीन देशों की बैठक, आखिर क्या खिचड़ी पक रही है?

चीन के कुन्मिंग शहर में आयोजित 9वें चीन-दक्षिण एशिया एक्सपो और 6वें चीन-दक्षिण एशिया सहयोग मंच (China-South Asia Cooperation Forum) के दौरान एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया.

चीन के कुन्मिंग शहर में आयोजित 9वें चीन-दक्षिण एशिया एक्सपो और 6वें चीन-दक्षिण एशिया सहयोग मंच (China-South Asia Cooperation Forum) के दौरान एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया. इस मंच के इतर बांग्लादेश, चीन और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों के बीच एक त्रिपक्षीय अनौपचारिक बैठक हुई, जिसे दक्षिण एशियाई कूटनीति के लिहाज से एक संभावित नई शुरुआत माना जा रहा है.

हालांकि यह बैठक औपचारिक रूप से घोषित नहीं की गई थी, लेकिन कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, तीनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने आपसी सहयोग बढ़ाने, क्षेत्रीय व्यापार को मजबूत करने और कनेक्टिविटी बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा की. यह पहली बार है जब बांग्लादेश ने चीन और पाकिस्तान के साथ एक त्रिपक्षीय चर्चा में हिस्सा लिया है, जिससे क्षेत्रीय रणनीतिक समीकरणों में बदलाव की संभावना जताई जा रही है.

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक के माध्यम से चीन ने अपने बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव (BRI) को लेकर एक नई रणनीतिक दिशा में कदम बढ़ाया है. पाकिस्तान पहले से ही चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का प्रमुख हिस्सा है, जबकि बांग्लादेश को हाल के वर्षों में BRI का संभावित लाभार्थी माना गया है. ऐसे में यह त्रिपक्षीय संवाद चीन के लिए दक्षिण एशिया में अपने प्रभाव को और मजबूत करने की दिशा में अहम साबित हो सकता है.

बैठक के दौरान चीन ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, व्यापार मार्गों और आर्थिक साझेदारी पर ज़ोर दिया, जबकि पाकिस्तान ने CPEC के अनुभव साझा किए. बांग्लादेश ने क्षेत्रीय व्यापार, बुनियादी ढांचे और तकनीकी सहयोग पर अपनी प्राथमिकताओं को रेखांकित किया.

हालांकि भारत की अनुपस्थिति और इस त्रिपक्षीय संवाद में पाकिस्तान की भागीदारी को लेकर कई राजनीतिक विश्लेषक सवाल उठा रहे हैं. कुछ का मानना है कि यह कदम भारत के लिए एक नई कूटनीतिक चुनौती खड़ी कर सकता है, जबकि कुछ इसे दक्षिण एशिया में चीन की बढ़ती कूटनीतिक पहुंच के तौर पर देख रहे हैं.

बांग्लादेश की भागीदारी यह संकेत देती है कि ढाका अब बहुपक्षीय मंचों पर अपनी भूमिका को पुनर्परिभाषित कर रहा है और रणनीतिक विविधीकरण की ओर अग्रसर है. यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आने वाले समय में इस अनौपचारिक त्रिपक्षीय वार्ता को औपचारिक रूप दिया जाएगा या यह केवल एक अवसरजनित कूटनीतिक संवाद तक सीमित रह जाएगा.



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