India EU trade deal: भारत और यूरोपीय संघ के बीच होने जा रहे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर अमेरिका ने कड़ा विरोध जताया है. अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने इस समझौते पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यूरोपीय देश अपनी ही मुश्किलें बढ़ा रहे हैं. उनका इशारा रूस-यूक्रेन युद्ध की ओर था. अमेरिका पहले से ही भारत पर आरोप लगाता रहा है कि रूस से तेल खरीदकर वह “पुतिन की वॉर मशीन” को मजबूत कर रहा है.
स्कॉट बेसेंट ने क्या कहा?
स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने के चलते भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया है. इसके बावजूद यूरोपीय देशों ने भारत के साथ बड़ा व्यापारिक समझौता कर लिया. उन्होंने कहा कि यूरोप ने भारत के साथ डील साइन करके असल में अपने ही खिलाफ जंग को फंड किया है.
कई अहम समझौतों की होगी घोषणा
इस बयान के बीच भारत और यूरोपीय संघ आज यानी 27 जनवरी 2026 को दिल्ली में 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन में कई अहम समझौतों की घोषणा करने जा रहे हैं. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा मौजूद रहेंगे.
‘मदर ऑफ ऑल डील्स’
करीब 18 साल की लंबी बातचीत के बाद यह FTA साकार होने जा रहा है. इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है. इस समझौते का मकसद भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार को नई ऊंचाई देना है. इसमें ऑटोमोबाइल, वाइन और स्पिरिट्स जैसे सेक्टरों पर खास ध्यान दिया गया है. भारत धीरे-धीरे या सीमित कोटा के तहत BMW, मर्सिडीज-बेंज और वोक्सवैगन जैसी यूरोपीय कारों पर टैरिफ कम कर सकता है. इसके बदले EU भारतीय टेक्सटाइल, फार्मा, जेम्स एंड ज्वेलरी और फुटवियर पर शुल्क घटाने को तैयार है.
क्या नहीं होगा समझोता का हिस्सा?
भारत ने साफ किया है कि कृषि और डेयरी उत्पाद इस समझौते का हिस्सा नहीं होंगे. वहीं यूरोपीय संघ चाहता है कि भारत अपने फाइनेंशियल और लीगल सर्विस सेक्टर में उन्हें ज्यादा पहुंच दे. व्यापारिक समझौते के अलावा भारत और EU के बीच सुरक्षा और रक्षा सहयोग पर भी सहमति बनने जा रही है. इसमें समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आतंकवाद से निपटने जैसे मुद्दे शामिल होंगे. इस साझेदारी के साथ भारत एशिया का तीसरा देश होगा, जापान और दक्षिण कोरिया के बाद, जिसने EU के साथ रक्षा सहयोग किया है.
मोबिलिटी एग्रीमेंट डील समझौता का हिस्सा
मोबिलिटी एग्रीमेंट भी इस डील का हिस्सा है. इसके तहत छात्रों, शोधकर्ताओं, मौसमी कामगारों और हाई-स्किल प्रोफेशनल्स की आवाजाही आसान होगी. साथ ही भारत और EU सप्लाई चेन को मजबूत करने पर भी काम करेंगे, ताकि चीन और अमेरिका पर निर्भरता कम की जा सके.
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कुल मिलाकर, अमेरिका की नाराजगी के बावजूद भारत और यूरोपीय संघ का यह समझौता वैश्विक राजनीति में एक बड़े रणनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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