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मोदी सरकार की कुशल कूटनीति- PAK द्वारा कराए गए पहलगाम आतंकी हमले की आखिरकार अब चीन ने भी की निंदा

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा, “चीन सभी प्रकार के आतंकवाद का कड़ा विरोध करता है और 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले (Pahalgam Attack) की कड़ी निंदा करता है.”

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

Pahalgam Attack: अमेरिका द्वारा द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) को एक विदेशी आतंकवादी संगठन (FTO) और एक विशेष रूप से नामित ग्लोबल टेररिस्ट ग्रुप घोषित करने के बाद चीन ने भी पहलगाम आतंकवादी हमले की निंदा की. साथ ही चीन ने क्षेत्रीय देशों से आतंकवाद-रोधी सहयोग बढ़ाने का आग्रह किया.

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा, “चीन सभी प्रकार के आतंकवाद का कड़ा विरोध करता है और 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करता है.” उन्होंने आगे कहा कि चीन पड़ोसी देशों से “आतंकवाद-रोधी सहयोग बढ़ाने और संयुक्त रूप से क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने” का आग्रह करता है.


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TRF ने कई हमलों की जिम्मेदारी ली है

इससे पहले अमेरिकी विदेश विभाग ने TRF को आतंकवादी संगठन घोषित किया और कहा कि TRF ने पहलगाम (Pahalgam Attack) समेत भारतीय सुरक्षा बलों पर कई हमलों की जिम्मेदारी ली है.

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा: “आज, विदेश विभाग द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) को एक नामित विदेशी आतंकवादी संगठन (FTO) और विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी (SDGT) के रूप में सूचीबद्ध कर रहा है. लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का एक मुखौटा और प्रॉक्सी, TRF ने 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम हमले की ज़िम्मेदारी ली थी, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे. यह 2008 में LeT द्वारा किए गए मुंबई हमलों के बाद से भारत में नागरिकों पर किया गया सबसे घातक हमला था. TRF ने भारतीय सुरक्षा बलों पर कई हमलों की जिम्मेदारी भी ली है, जिनमें हाल ही में 2024 में हुआ हमला भी शामिल है.”

इसके अलावा मार्को रुबियो ने आतंकवाद का मुकाबला करने के ट्रंप प्रशासन के संकल्प को दोहराया. उन्होंने कहा, “विदेश विभाग द्वारा की गई ये कार्रवाइयां हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा, आतंकवाद का मुकाबला करने और पहलगाम हमले के लिए राष्ट्रपति ट्रंप के न्याय के लिए ट्रंप प्रशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.” .

इस कदम से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 समिति, जो कि एक अंतरराष्ट्रीय बॉडी है जो आतंकवादी संस्थाओं पर संपत्ति ज़ब्त, यात्रा प्रतिबंध और हथियार प्रतिबंध लगाता है, में होने वाली चर्चाओं पर असर पड़ने की उम्मीद है.

-भारत एक्सप्रेस



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