US Voter Data Breach: अमेरिकी व्हाइट हाउस ने गुरुवार को एक फैक्ट शीट जारी कर बड़ा खुलासा किया. इसमें कहा गया कि चीन और उसके सहयोगियों ने करीब 22 करोड़ अमेरिकी नागरिकों का वोटर रजिस्ट्रेशन डेटा हासिल कर लिया है. इसमें वह जानकारी भी शामिल है जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं थी.
ट्रांसपेरेंसी टास्क फोर्स किसने जारी किया?
यह दस्तावेज व्हाइट हाउस की गवर्नमेंट ट्रांसपेरेंसी टास्क फोर्स ने जारी किया है. इसमें बताया गया कि इसे राष्ट्रीय खुफिया निदेशक कार्यालय, एनएसए, सीआईए और होमलैंड सिक्योरिटी के प्रमुखों ने मंजूरी दी है. यह रिपोर्ट राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में डिक्लासिफाई किए गए चुनाव संबंधी विदेशी गतिविधियों से जुड़ी फाइलों पर आधारित है.
चुनावी हस्तक्षेप की परिभाषा
व्हाइट हाउस ने इंटेलिजेंस कम्युनिटी की आधिकारिक परिभाषा भी सार्वजनिक की. इसमें कहा गया कि ‘इलेक्शन इन्फ्लुएंस’ यानी चुनावी प्रभाव में विदेशी सरकारों या उनके एजेंटों की गतिविधियां शामिल होती हैं, जिनका मकसद उम्मीदवारों, पार्टियों या मतदाताओं की सोच को प्रभावित करना होता है. वहीं ‘इलेक्शन इंटरफेरेंस’ यानी चुनावी हस्तक्षेप तकनीकी पहलुओं को निशाना बनाता है, जैसे वोटर रजिस्ट्रेशन, बैलेट डालना, गिनती और नतीजों की रिपोर्टिंग.
वोटर रजिस्ट्रेशन पर सीधा निशाना
रिपोर्ट में साफ कहा गया कि अगर कोई विदेशी ताकत वोटर रजिस्ट्रेशन सिस्टम या डेटा को निशाना बनाती है तो यह चुनावी हस्तक्षेप की श्रेणी में आता है. 2022 की इंटेलिजेंस रिपोर्ट में एक चीनी नेटवर्क एक्सप्लॉइटेशन ग्रुप का नाम आया था, जिसने कमर्शियल वेबसाइट्स से वोटर डेटा हासिल किया था.
साइबर ऑपरेशन का तरीका
व्हाइट हाउस के मुताबिक, ऐसे CNE ग्रुप आमतौर पर साइबर हमलों के जरिए गैर-सार्वजनिक जानकारी चुराते हैं. दस्तावेजों में यह भी बताया गया कि अगर कोई दुश्मन देश इस तरह का डेटा हासिल कर ले तो उसके कई खतरनाक नतीजे हो सकते हैं.
संभावित खतरे
डिक्लासिफाई किए गए दस्तावेजों में लिखा है कि विरोधी ताकतें डेटा में बदलाव कर सकती हैं, जिससे कुछ मतदाताओं को वोट डालने से रोका जा सकता है. इससे चुनाव के दिन देरी हो सकती है या मतदाताओं को प्रोविजनल बैलेट का इस्तेमाल करना पड़ सकता है. साथ ही यह डेटा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होने पर अन्य हस्तक्षेप या प्रभावी रणनीतियों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
ट्रंप का भाषण और एजेंसियों की भूमिका
व्हाइट हाउस ने यह भी बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप के 16 जुलाई 2026 के भाषण से पहले कई एजेंसियों ने मिलकर तैयारी की थी. इसमें ODNI, DHS, CIA, NSA और FBI के प्रतिनिधियों ने व्हाइट हाउस के साथ समन्वय किया. फैक्ट शीट में कहा गया कि राष्ट्रपति के भाषण में इस्तेमाल किए गए तथ्य इन्हीं एजेंसियों द्वारा मंजूर किए गए थे.
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पारदर्शिता की कवायद
यह कदम ट्रंप प्रशासन की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें चुनाव सुरक्षा और विदेशी साइबर गतिविधियों से जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक किया जा रहा है. प्रशासन का कहना है कि दस्तावेजों को सार्वजनिक करने से लोगों को इंटेलिजेंस आकलन और चुनावी सुरक्षा पर ज्यादा पारदर्शिता मिलती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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