अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप.
राष्ट्रपति ट्रंप की नई पारी को लेकर भारत समेत दुनिया भर में एक अनिश्चितता का माहौल है. दरअसल ट्रम्प के आते ही 18000 हजार भारतीयों को deport करने को लेकर संशय और गहरा गया है. दूसरा H1-B वीसा को लेकर भी कुछ खास clearity नहीं दिखाई दे रही. वही ट्रम्प कई अपने प्रचार में भारत पर टैरिफ बढ़ाने का संकेत दे चुके है इसको लेकर भी भारत का थिंक टैंक असमंजस की स्थिति में है. हालांकि ट्रंप अपनी नीतियां को “अमेरिका फर्स्ट”की पॉलिसी से प्रेरित बताते हैं. इन सभी मुद्दों को लेकर सवाल ये खड़ा होता की क्या ट्रम्प दूसरे देशों के हितों को अपनी पालिसी में कितना समावेश कर पाएंगे.
फिलहाल H1-B पर राहत के संकेत
H1-B वीसा को लेकर एक बड़ी राहत दिखाई दे रही.अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को H-1B वीजा पर भारतीयों के लिए बड़ी राहत का ऐलान किया..NYT के मुताबिक ट्रम्प ने कहा कि ये वीजा बंद नहीं होंगे. अमेरिका को टैलेंट की जरूरत है. उन्होंने कहा कि हमें सिर्फ इंजीनियर ही नहीं चाहिए, अन्य जॉब्स के लिए भी बेस्ट प्रोफेशनल्स चाहिए. ये अमेरिकियों को ट्रेनिंग भी देंगे.
टैरिफ को लेकर असमंजस
चुनावो के दौरान प्रचार में अपने भाषणों में ट्रंप बार-बार मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (MAGA) का जिक्र करते रहे हैं. सोमवार को अपने संबोधन में भी ट्रंप ने इसका जिक्र किया. ट्रंप के अनुसार मेक अमेरिका ग्रेट अगेन का अर्थ है सारी आर्थिक गतिविधियों को अमेरिका में ही केंद्रित करना. गौरतलब है कि भारत अमेरिका दुनिया के दो बड़े ट्रेडिंग पार्टनर हैं. अमेरिकी सरकार के अनुसार वर्ष 2022 में अमेरिका भारत के बीच व्यापार का आंकड़ा 191.8 अरब डॉलर था. अमेरिका ने इस वर्ष भारत को 73 अरब डॉलर का निर्यात किया और 118.8 अरब डॉलर का आयात किया. इसका अर्थ है व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में है. ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि भारत हमारे सामान पर ज्यादा टैरिफ लगा रहा है और अमेरिका भी इसके जवाब में कदम उठा सकता है. ट्रंप ने 1 फरवरी से कनाडा और मेक्सिको पर 25 फीसदी टैरिफ का ऐलान कर दिया है. सवाल है कि क्या वो भारत के लिए भी ऐसा करेंगे. अगर ट्रंप ये कदम उठाते हैं तो ये भारतीय निर्यात के लिए प्रतिकूल होगा. हालाकि वित्तमंत्रालय ने इसको लेकर सारे permutation-combination तैयार कर रखे ताकि किसी विपरीत परिस्तिथि से निपटा जा सके.
गिरता रुपया भारत की चिंता
गिरते रुपए को लेकर भारत काफी चिंतित दिखाई दे रहा है. दरअसल अमेरिका के नए राष्ट्रपति की नीतियां गिरते रुपये की सेहत के लिए भी नुकसानदेह हो सकती है. इसका नुकसान आखिरकार देश की इकोनॉमी को होगा. भारत के लिए आयात महंगा हो जाएगा. इससे महंगाई बढ़ेगी. डॉलर की कीमतें बढ़ने से भारत के निवेशकों के लिए अमेरिका समेत दुनिया दूसरे डॉलर आधारित बाजार में निवेश करना महंगा होगा. संयुक्त राज्य अमेरिका में भारत का एफडीआई (स्टॉक) 2022 में 3.7 बिलियन डॉलर था, जो 2021 से 7.0 प्रतिशत अधिक था. डॉलर की कीमतें बढ़ने से भारत के लिए निवेश महंगा होगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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