Bharat Express DD Free Dish
Pension Mission Shakti Digital
Pension Mission Shakti Digital

8 देशों के चुनाव में ट्रंप का दांव पड़ा भारी! 6 जगह पसंदीदा उम्मीदवार हारे, क्या अमेरिका का दबदबा हो रहा है खत्म?

Donald Trump Global Influence: डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले दो वर्षों में आठ देशों के चुनावों में अपने पसंदीदा उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों का समर्थन किया. हालांकि कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, रोमानिया, हंगरी, ब्राजील और जर्मनी समेत छह देशों में उनके समर्थित उम्मीदवार हार गए.

Why did Trump’s gamble falter?

ट्रंप का दांव क्यों पड़ा कमजोर?

Donald Trump Global Influence: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से ऐसे नेता माने जाते हैं जो सिर्फ अपने देश की राजनीति तक सीमित नहीं रहते, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मुद्दों और दूसरे देशों के चुनावों पर भी खुलकर राय रखते हैं. वह अक्सर कोशिश करते हैं कि दुनिया के अलग-अलग देशों की नीतियां और सरकारें अमेरिकी हितों के अनुरूप चलें. इसके लिए कभी आर्थिक दबाव बनाया जाता है, कभी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी जाती है और कई बार विदेशी नेताओं या उम्मीदवारों को खुला समर्थन भी दिया जाता है.

दो साल के नतीजों ने खड़े किए सवाल

हाल के वर्षों में कई देशों में हुए चुनावों के नतीजों ने ट्रंप की राजनीतिक पकड़ को लेकर नई बहस छेड़ दी है. दावा किया जा रहा है कि पिछले दो वर्षों के दौरान ट्रंप ने आठ देशों में अपने पसंदीदा नेताओं या राजनीतिक दलों के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की. हालांकि चुनावी परिणामों में तस्वीर उम्मीद के उलट दिखाई दी. आंकड़ों के अनुसार, इन आठ देशों में से छह स्थानों पर ट्रंप समर्थित उम्मीदवार या राजनीतिक धड़े जीत दर्ज नहीं कर सके.

सिर्फ जापान और होंडुरास में मिला फायदा

उपलब्ध चुनावी परिणामों के अनुसार, जापान और होंडुरास ऐसे दो देश रहे जहां ट्रंप के समर्थन वाले पक्ष को सफलता हासिल हुई. इसके उलट कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, रोमानिया, हंगरी, ब्राजील और जर्मनी में ट्रंप की पसंद के उम्मीदवारों को मतदाताओं का पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पाया. इससे यह चर्चा तेज हो गई कि क्या वैश्विक स्तर पर ट्रंप का प्रभाव पहले जितना नहीं रह गया है.

कनाडा में नहीं चला ट्रंप फैक्टर

अप्रैल 2025 में कनाडा में हुए चुनाव ट्रंप के लिए निराशाजनक रहे. यहां कंजर्वेटिव नेता पियरे पोइलिवर को ट्रंप की नीतियों के करीब माना जाता था. इसके बावजूद चुनावी मुकाबले में मार्क कार्नी के नेतृत्व वाली लिबरल पार्टी ने जीत हासिल कर ली. विश्लेषकों का मानना रहा कि कनाडा को अमेरिका में शामिल करने संबंधी बयानों और टैरिफ से जुड़ी धमकियों ने राष्ट्रीय स्वाभिमान का मुद्दा पैदा किया, जिसका असर चुनावी माहौल पर पड़ा.

ऑस्ट्रेलिया में भी नहीं मिला समर्थन

मई 2025 में ऑस्ट्रेलिया के आम चुनावों में भी ट्रंप विचारधारा से जोड़े जाने वाले कंजर्वेटिव नेता पीटर डटन को हार का सामना करना पड़ा. दूसरी ओर, एंथनी अल्बनीज के नेतृत्व वाली लेबर पार्टी ने चुनाव जीत लिया. कई चुनावी विश्लेषणों में ट्रंप की व्यापारिक नीतियों और टैरिफ रुख को मतदाताओं की नाराजगी से जोड़कर देखा गया.

रोमानिया में राष्ट्रवादी उम्मीदवार पराजित

रोमानिया में मई 2025 में हुए राष्ट्रपति चुनाव में MAGA विचारधारा के समर्थक माने जाने वाले जॉर्ज सिमियोन मैदान में थे. लेकिन उन्हें निकुशोर दान ने हरा दिया. चुनावी नतीजों में दान को लगभग 54 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए, जबकि सिमियोन राष्ट्रपति पद हासिल नहीं कर सके.

हंगरी में ओर्बन नहीं बचा पाए सत्ता

अप्रैल 2026 में हंगरी के चुनाव भी चर्चा में रहे. लंबे समय से प्रधानमंत्री रहे विक्टर ओर्बन को ट्रंप का करीबी माना जाता है. चुनाव से पहले ट्रंप ने उनका समर्थन किया था और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी हंगरी पहुंचे थे. इसके बावजूद पीटर मग्यार की अगुवाई वाली विपक्षी ताकतों ने जीत दर्ज की और ओर्बन सत्ता बचाने में नाकाम रहे.

ब्राजील में भी समर्थित पक्ष को झटका

अक्टूबर 2026 में ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप प्रशासन से जुड़े अधिकारियों द्वारा बोल्सोनारो परिवार की वापसी के लिए कोशिशें किए जाने की खबरें सामने आईं. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति लूला पर दबाव बनाने और फ्लावियो बोल्सोनारो को राजनीतिक लाभ पहुंचाने वाले कदमों के समर्थन की बात कही गई. हालांकि 25 अक्टूबर 2026 को हुए चुनाव में लूला ने फ्लावियो बोल्सोनारो को हराकर जीत दर्ज कर ली.

जर्मनी में AfD सरकार नहीं बना सकी

फरवरी 2025 में जर्मनी के आम चुनावों से पहले ट्रंप के करीबी सहयोगी एलन मस्क ने दक्षिणपंथी पार्टी AfD और उसकी नेता एलिस वाइडेल के पक्ष में खुलकर समर्थन जताया था. बावजूद इसके, 23 फरवरी 2025 के चुनाव में AfD सबसे बड़ी पार्टी नहीं बन सकी. उसे 20.8 प्रतिशत वोट मिले और वह दूसरे स्थान पर रही. सबसे ज्यादा समर्थन फ्रेडरिक मर्ज के नेतृत्व वाले CDU/CSU गठबंधन को मिला.

जापान में समर्थन का मिला फायदा

जापान ट्रंप समर्थित खेमे की सफलता का एक बड़ा उदाहरण रहा. फरवरी 2026 में हुए चुनाव में प्रधानमंत्री साने ताकाइची के नेतृत्व वाले गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन किया. मतदान से ठीक पहले 6 फरवरी को ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से ताकाइची का समर्थन किया था. उन्होंने उन्हें मजबूत और समझदार नेता बताते हुए कहा था कि वे जापान के लोगों की उम्मीदों पर खरी उतरेंगी. साथ ही अमेरिका-जापान व्यापार और सुरक्षा संबंधों को भी अहम बताया गया.

होंडुरास में समर्थित उम्मीदवार बने विजेता

सेंट्रल अमेरिका के देश होंडुरास में भी ट्रंप का समर्थन असरदार साबित हुआ. राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार नासरी असफुरा को चुनाव से कुछ समय पहले ट्रंप का समर्थन मिला था. उन्होंने यह संकेत भी दिया था कि असफुरा की हार की स्थिति में अमेरिकी आर्थिक सहायता प्रभावित हो सकती है. मतगणना के दौरान ट्रंप ने चुनावी नतीजों में बदलाव की कोशिशों का आरोप लगाया, हालांकि इसके समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया. आखिरकार 24 दिसंबर 2025 को चुनाव अधिकारियों ने नासरी असफुरा को विजेता घोषित कर दिया.

ये भी पढ़ें-UAE में तेल रिसाव से बढ़ा संकट, कई बीच बंद; समुद्री जीवों और पर्यावरण पर मंडराया बड़ा खतरा

क्या बदल रहा है वैश्विक राजनीतिक समीकरण?

इन आठ चुनावों के नतीजों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नई बहस को जन्म दिया है. कभी दुनिया भर में असर रखने वाले ट्रंप के समर्थन को अब हर जगह चुनावी सफलता की गारंटी नहीं माना जा रहा. हालांकि जापान और होंडुरास में उनके पसंदीदा उम्मीदवार जीतने में सफल रहे, लेकिन छह देशों में मिली हार ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या विदेशी मतदाता अब अपने घरेलू मुद्दों को बाहरी राजनीतिक प्रभाव से ज्यादा महत्व देने लगे हैं.

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Pension Mission Shakti Digital