US Israel Iran conflict: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के ईरान को लेकर दिए गए बयानों ने बीते दो हफ्तों में कई बार दिशा बदली है. कभी वह कहते हैं कि ईरान पर सबसे बड़ा हमला होगा तो कभी दावा करते हैं कि जंग जीत ली गई है. अगले ही दिन वह कहते हैं कि काम अधूरा है और जल्द ही खत्म होगा. इन विरोधाभासी बयानों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि ट्रंप सच में रणनीति बना रहे हैं या खुद असमंजस में हैं.
13 मार्च: भारी हमले की चेतावनी
ट्रंप (Donald Trump) ने एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिकी सेना ईरान पर बहुत बड़ा हमला करेगी और उसे पूरी तरह तबाह कर देगी. हालांकि उन्होंने (Donald Trump) यह भी माना कि ईरान की सत्ता को गिराना आसान नहीं होगा. इससे पहले उन्होंने दावा किया था कि ईरान की सैन्य संरचना को अमेरिका ने काफी नुकसान पहुंचाया है.
12 मार्च: जीत का दावा
एक दिन पहले ट्रंप (Donald Trump) ने कहा कि ईरान की जंग जीत ली गई है, लेकिन अधूरा काम नहीं छोड़ेंगे. उन्होंने बताया कि ईरान के 85% ड्रोन नष्ट कर दिए गए हैं और मिसाइल फैक्ट्रियां भी तबाह हो चुकी हैं. उनका (Donald Trump) कहना था कि ईरान को अंदाजा नहीं है कि वह किससे टकरा रहा है.
11 मार्च: होर्मुज स्ट्रेट पर बयान
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर दिया और खबरें आईं कि वहां बारूदी सुरंगें बिछाई गई हैं. ट्रंप (Donald Trump) ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर ईरान ने माइंस लगाई हैं तो अमेरिका उन्हें हटाएगा और ईरान को भारी कीमत चुकानी होगी. कुछ ही घंटों बाद ईरान ने अमेरिकी तेल टैंकर पर हमला कर दिया.
10 मार्च: पेंटागन का अलग रुख
रक्षा मंत्री हेगसेथ ने कहा कि जंग तेज हो रही है और यह दिन ईरान के लिए सबसे घातक साबित होगा. उन्होंने ट्रंप (Donald Trump) के मिशन कंप्लीट वाले बयान से अलग राय दी और कहा कि युद्ध खत्म करने का फैसला राष्ट्रपति के हाथ में है.
9 मार्च: विरोधाभासी बयान
ट्रंप (Donald Trump) ने दावा किया कि ईरान युद्ध लगभग पूरा हो चुका है. इसके बाद तेल की कीमतें गिर गईं. लेकिन उसी शाम उन्होंने कहा कि वह ईरान की धार्मिक नेतृत्व पर दबाव बना रहे हैं ताकि अंतिम जीत हासिल हो सके.
7 मार्च: जमीनी सेना का संकेत
ट्रंप (Donald Trump) ने कहा कि अमेरिकी सैनिक ईरान में उतर सकते हैं ताकि उसके यूरेनियम भंडार सुरक्षित किए जा सकें. इससे पहले उन्होंने ईरान के परमाणु केंद्रों को नुकसान पहुंचाने का दावा किया था.
6 मार्च: सरेंडर की शर्त
ट्रंप (Donald Trump) ने कहा कि युद्ध तभी खत्म होगा जब ईरान बिना शर्त आत्मसमर्पण करेगा. ईरान ने उलटे हमले तेज कर दिए. अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद ट्रंप ने संकेत दिया कि वह नए नेतृत्व के चयन में भूमिका चाहते हैं, लेकिन ईरान ने उनके बेटे को सुप्रीम लीडर बना दिया.
5 मार्च: सेना भेजने पर पलटी
एक न्यूज चैनल से बातचीत में ट्रंप (Donald Trump) ने कहा कि इन्फेंट्री भेजना समय की बर्बादी हो सकती है, लेकिन यह भी कहा कि वह इलाके में जाकर क्लीन आउट करना चाहते हैं. उनके ऐसे बयान से सैन्य विशेषज्ञ भी हैरान रह गए.
3 मार्च: इजरायल पर बयान
ट्रंप (Donald Trump) ने अपने विदेश मंत्री के बयान को गलत बताया जिसमें कहा गया था कि इजरायल की वजह से अमेरिका युद्ध में उतरा. ट्रंप ने कहा कि हमला करने का फैसला उनका था क्योंकि उन्हें लगा कि ईरान पहले हमला करेगा.
2 मार्च: एयरस्ट्राइक और पलट बयान
जंग के तीसरे दिन ट्रंप (Donald Trump) ने कहा कि जरूरत पड़ी तो अमेरिका जमीनी सेना भेजेगा. उन्होंने पहले कहा था कि जंग 4-5 हफ्तों में खत्म होगी लेकिन बाद में बोले कि अमेरिका लंबे समय तक लड़ने की क्षमता रखता है.
1 मार्च: जल्दी खत्म होने का दावा
हवाई हमले के अगले दिन ट्रंप (Donald Trump) ने कहा कि संघर्ष ज्यादा लंबा नहीं चलेगा और मिशन 4 हफ्तों या उससे कम में पूरा हो जाएगा.
28 फरवरी: युद्ध की शुरुआत
अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हवाई हमला किया. ट्रंप ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के चार लक्ष्य बताए मिसाइल क्षमता खत्म करना, नौसेना को नष्ट करना, परमाणु हथियारों की आशंका मिटाना और ईरानी समर्थित समूहों को रोकना. उनका कहना था कि बमबारी तब तक जारी रहेगी जब तक मिडिल ईस्ट और दुनिया में शांति स्थापित नहीं हो जाती.
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इन 14 दिनों में ट्रंप के बयानों ने कई बार दिशा बदली है. कभी जीत का दावा, कभी अधूरा काम, कभी भारी हमले की चेतावनी इन सबने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यह सब एक सोची-समझी रणनीति है या फिर राष्ट्रपति खुद भ्रमित हैं.
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