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क्या हैं ‘नो किंग्स’ रैलियां? ट्रंप के खिलाफ आक्रोश में अमेरिका के 50 शहर

अमेरिका में ‘नो किंग्स’ मार्च के तहत शिकागो के ग्रांट पार्क सहित देश भर में विशाल प्रदर्शन हुए. प्रदर्शनकारी ट्रंप सरकार की सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी, नेशनल गार्ड की तैनाती और ईरान के साथ युद्ध की आशंकाओं का विरोध कर रहे हैं. इस आंदोलन का मुख्य संदेश “लोकतंत्र, राजतंत्र नहीं” है.

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Trump No Kings Protest 2026: अमेरिका की सड़कों पर इस वक्त जो मंजर है, उसे देखकर लगता है कि वहां की सियासत में एक बड़ा तूफान आ चुका है. ‘नो किंग्स’ (No Kings) के नारों से गूंजते अमेरिका के 50 से ज्यादा शहर इस वक्त डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की नीतियों के खिलाफ आर-पार की जंग लड़ रहे हैं. शिकागो के ग्रांट पार्क से लेकर न्यूयॉर्क की तंग गलियों तक, हजारों लोग इस मार्च का हिस्सा बन रहे हैं. लेकिन सवाल यह है कि आखिर ये ‘नो किंग्स’ रैलियां हैं क्या और क्यों पूरा अमेरिका इस वक्त सुलग रहा है?

क्या है ‘नो किंग्स’ आंदोलन का असली मतलब?

सरल भाषा में कहें तो ‘नो किंग्स’ का अर्थ है “हमें राजा नहीं, राष्ट्रपति चाहिए.” प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ट्रंप प्रशासन की कार्यशैली धीरे-धीरे लोकतांत्रिक कम और तानाशाही वाली ज्यादा होती जा रही है. शिकागो में जुटी भीड़ के हाथों में मौजूद पोस्टरों पर साफ लिखा है “Democracy not Monarchy”. जून और अक्टूबर में हुई पिछली दो रैलियों के बाद यह तीसरा और अब तक का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन है.

 

शिकागो बना विद्रोह का एपिसेंटर

शिकागो में हालात काफी तनावपूर्ण हैं. यहां के लोग और स्थानीय नेता, विशेष रूप से गवर्नर जे.बी. प्रित्ज़कर, ट्रंप प्रशासन द्वारा शहर में नेशनल गार्ड तैनात करने की धमकी से बेहद नाराज हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रशासन अपनी इमिग्रेशन नीतियों और नेशनल गार्ड के डर से आम नागरिकों और प्रवासियों की आवाज को दबाना चाहता है. शिकागो की सड़कों पर उमड़ा यह जनसैलाब सिर्फ अप्रवासन ही नहीं, बल्कि ट्रंप सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों और संभावित ईरान युद्ध के खिलाफ भी अपनी आवाज बुलंद कर रहा है.

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50 शहरों कि एक ही मांग

यह गुस्सा सिर्फ शिकागो तक सीमित नहीं है. लॉस एंजेलिस, न्यूयॉर्क और वाशिंगटन डीसी जैसे अमेरिका के 50 बड़े शहरों में इसी तरह की ‘नो किंग्स’ रैलियां निकाली जा रही हैं. लोग आर्थिक संकट, बढ़ती महंगाई और लोकतंत्र पर मंडराते कथित खतरों को लेकर डरे हुए हैं. प्रदर्शनकारियों का मानना है कि ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन की नीतियां देश को एक ऐसे रास्ते पर ले जा रही हैं जहां संविधान और व्यक्तिगत आजादी खतरे में पड़ सकती है.

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-भारत एक्सप्रेस



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