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“ट्रंप की बात को जितनी जल्दी सीरियस लें, उतना अच्छा होगा”, अब निक्की हेली ने भारत को दी नसीहत, तो जयशंकर ने दिया मुंहतोड़ जवाब

निक्की हेली ने ये भी कहा कि “व्यापार विवाद और रूस से तेल आयात के मुद्दे पर कठिन बातचीत बहुत जरूरी है, लेकिन साझा लक्ष्य सबसे अहम हैं.”

Nikki Haley

पूर्व राजदूत निक्की हेली और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर.

अमेरिकी टैरिफ से बढ़े तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की पूर्व राजदूत रहूीं, निक्की हेली (Nikki Haley) ने नसीहत भरे लहजे में कहा कि “रूसी तेल खरीद के मुद्दे पर जितनी जल्दी हो सके, भारत ट्रंप प्रशासन के साथ मिलकर इसका समाधान निकाल ले, क्योंकि ये जितना जल्दी होगा, उतना अच्छा रहेगा.”

Nikki Haley ने क्या कहा?

निक्की हेली ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा- “दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक ताकतों के बीच दशकों से चली आ रही दोस्ती और भरोसा मौजूदा मतभेदों की वजह से कमजोर हो रहा है.”

इस दौरान निक्की हेली ने ये भी कहा कि “व्यापार विवाद और रूस से तेल आयात के मुद्दे पर कठिन बातचीत बहुत जरूरी है, लेकिन साझा लक्ष्य सबसे अहम हैं.” हालांकि उन्होंने ट्रंप प्रशासन को भी चेताते हुए कहा कि चीन का सामना करने के लिए अमेरिका को भारत जैसे दोस्त की जरूरत है.

पहले भी नसीहत दे चुकी हैं Nikki Haley

ये पहला मौका नहीं है, जब निक्की हेली (Nikki Haley) ने भारत को चेतावनी दी है, इससे पहले भी उन्होंने कहा था कि भारत-अमेरिका के रिश्ते एक नाजुक मोड़ पर हैं, ऐसे में टैरिफ विवाद को दोनों देशों के बीच दरार का कारण नहीं बनने देना चाहिए.

यह भी पढ़ें- एस जयशंकर की दो टूक, भारत से दिक्कत है तो न खरीदें तेल, हमारे लिए किसानों के हित सर्वोपरि है

वहीं अमेरिका की तरफ से लगाए गए 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ को लेकर भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, “हमारी चिंता इस बात को लेकर है कि सीमाएं मुख्य रूप से हमारे किसानों और कुछ हद तक हमारे छोटे उत्पादकों के हित से जुड़ी हैं. हम, एक सरकार के रूप में, अपने किसानों और छोटे उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं. हम इस पर पूरी तरह दृढ़ हैं. इस पर समझौता नहीं किया जा सकता.”

विदेश मंत्री ने दिया करारा जवाब

विदेश मंत्री ने आगे कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दुनिया और यहां तक कि अपने देश के साथ भी व्यवहार करने का तरीका पारंपरिक रूढ़िवादी तरीके से बेहद अलग है. विदेश मंत्री ने कहा कि यूरोपीय संघ और चीन भी रूस से तेल आयात कर रहा है, ऐसे में जो आरोप हम पर लग रहे हैं कि भारत पुतिन का खजाना भर रहा है, तो क्या ये लोग पुतिन के खजाने को नहीं भर रहे हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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