भारत से निकलकर दुनिया की सबसे इनोवेटिव इलेक्ट्रिक कार मैन्युफैक्चरिंग कंपनी टेस्ला (Tesla) में सर्वोच्च पद तक पहुंचने वाले भारतीय इंजीनियर सिद्धांत अवस्थी (Siddhant Awasthi) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. अवस्थी टेस्ला के साइबर ट्रक प्रोग्राम के प्रमुख के रूप में कार्यरत थे और उन्होंने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने इस्तीफे पोस्ट के जरिए अपने इस्तीफे की बात कही.
कंपनी को छोड़ना एक कठिन फैसला
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में अवस्थी ने अपने इस्तीफे का ऐलान करते हुए कहा, “टेस्ला में अपने शानदार प्रदर्शन के बाद, हाल ही में इसे छोड़ने का फैसला किया है, जो कि मेरी जिंदगी के अब तक के सबसे कठिन फैसलों में से एक है. आठ साल पहले, जब मैंने यहां एक इंटर्न के तौर पर शुरुआत की थी, तो कभी नहीं सोचा था कि मुझे साइबरट्रक प्रोग्राम का नेतृत्व करने का मौका मिलेगा.”
उन्होंने आगे पोस्ट में एलन मस्क और सभी टेस्ला के लीडर्स (पूर्व और वर्तमान), मेंटर्स और सभी ग्राहकों का धन्यवाद भी किया.
8 साल पहले किया था ज्वाइन
आपको बता दें कि टेस्ला कंपनी को अवस्थी ने 8 वर्ष एक इंटर्न के तौर पर ज्वाइन किया था. उन्होंने बताया कि उनको अपने इस पूरे आठ वर्ष के कार्यकाल के दौरान मॉडल 3 को बेहतर बनाने, गीगा शंघाई पर काम करने, नए इलेक्ट्रॉनिक्स और वायरलेस आर्किटेक्चर विकसित करने और साइबरट्रक पर काम करने का मौका मिला.
उन्होंने पोस्ट में आगे कहा कि यह फैसला आसान नहीं था, वो भी तब जब आपके सामने ग्रोथ के इतने सारे अवसर मौजूद हो. टेस्ला की गाड़ियों काफी जटिल हैं, लेकिन उन्हें वह क्रेडिट नहीं मिलता है, जो मिलना चाहिए. ये गाड़ियां लोगों की जिंदगी को बदलने में सफल रही हैं. अवस्थी ने पोस्ट के अंत में कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि टेस्ला अपने मिशन में जरूर कामयाब होगा और मैं अपनी जिंदगी के अगले अध्याय के लिए रोमांचित हूं.
टेस्ला भारत में भी कदम रख चुकी है, लेकिन कंपनी अब तक कुछ खास कमाल दिखाने में कामयाब नहीं रही है. बीते महीने कंपनी की बिक्री मजह 40 यूनिट्स थी, जिससे कंपनी की देश में संचयी बिक्री 104 यूनिट्स हो गई है.
कॉलेज स्टुडेंट से टेस्ला तक का सफर
सिद्धांत अवस्थी अपने करियर की शुरुआत काफी तेजी से की. उन्होंने एक हाइपरलूप स्कूल प्रोजेक्ट पर काम किया, टेस्ला में इंटर्नशिप की और
मास्टर्स पूरा करते ही 2018 में कंपनी में शामिल हो गए. उनका काम इतना शानदार रहा कि दो साल के में ही वे इंजीनियरिंग मैनेजर बन गए, जिसके 1 साल बाद, वे सीनियर टेक्निकल प्रोग्राम मैनेजर के पद पर पहुंच गए. इस पह पर उन्होंने साइबरट्रक के 48-वोल्ट आर्किटेक्चर की देखरेख की.
वहीं 2022 के आखिर में, जब टेस्ला साइबरट्रक का प्रोडक्शन शुरू करने की तैयारी कर रही थी, अवस्थी को इलेक्ट्रिक ट्रक प्रोग्राम का हेड बना दिया गया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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