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मध्य पूर्व में हो रहे संघर्ष की कीमत पूरी दुनिया चुका रही है. इस जंग की वजह से ग्लोबल मार्केट में ऊर्जा का अभूतपूर्व संकट पैदा हो गया है. जिसको लेकर दुनिया भर के देश ईंधन बचाने और वैकल्पिक उपायों से अपनी अर्थव्यवस्था को चालू रखने की कोशिश कर रहे हैं. चाहे एशिया से लेकर यूरोप तक और अफ्रीका से लेकर लैटिन अमेरिका तक के देश ऊर्जा संकट का सामना कर रहे हैं. दुनिया के कई देशों की सरकारों ने इससे बचने के लिए सार्वजनिक छुट्टियां, वर्क फ्रॉम होम और औद्योगिक तालाबंदी जैसे तरीके अपना रहे हैं. ताकि ऊर्जा के क्षेत्र में उपजे इस संकट का सामना किया जा सके.
पाकिस्तान में हफ्ते में 3 दिन की छुट्टी
ईरान युद्ध का सबसे ज्यादा असर पाकिस्तान पर दिख रहा है. पहले से ही चरमराई अर्थव्यवस्था को ऊर्जा संकट ने तोड़ कर रख दिया है. जिससे मुकाबला करने के लिए पाकिस्तानी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए हफ्ते में सिर्फ 4 दिन काम करने का नियम लागू कर दिया है. ताकि ईंधन की बचत किया जा सके. इसके अलावा सरकार ने ईंधन आवंटन में 50 प्रतिशत की कटौती भी कर दी है.
ऊर्जा संकट का असर पूर्वी एशिया में भी दिख रहा है. जहां वियतनाम सरकार ने वर्क फॉर्म होम और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस्तेमाल की अपील की है. वहीं फिलीपींस ने भी सरकारी कर्मचारियों के लिए 4 डे वीक फॉर्मूला अपनाया है. पूर्वी एशिया में ईरान युद्ध का सबसे ज्यादा असर म्यांमार में देखने को मिल रहा है. यहां पेट्रोल पंप बंद हो रहे हैं. सरकार ने ऊर्जा बचाने के लिए ऑड-ईवन फॉर्मूला लागू कर दिया है.
बांग्लादेश में स्कूल बंद, श्रीलंका ने तेल का कोटा किया फिक्स
दक्षिणी एशियाई देशों में बांग्लादेश और श्रीलंका भी गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं. श्रीलंका ने स्कूलों और विश्वविद्यालयों के लिए अनिवार्य छुट्टी घोषित कर दी है. इसके अलावा एक व्यक्ति पर हर हफ्ते सिर्फ 15 लीटर पेट्रोल-डीजल का कोटा फिक्स कर दिया है. यानी एक व्यक्ति तो एक हफ्ते में सिर्फ 15 लीटर ईंधन मिलेगा.
वहीं बांग्लादेश ने ऊर्जा की कमी से बचने के लिए घरेलू स्तर पर 5 घंटे बिजली कटौती को मंजूरी दे दी है. ताकि कपड़ा उद्योग को ऊर्जा लगातार मिलती रहे. इसके अलावा सभी शिक्षण संस्थानों को ऑनलाइन शिक्षा देने के लिए आदेश दिया गया है. इसके अलावा भूटान ने ईंधन की जमाखोरी पर रोक लगा दी है.
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यूरोप में भी है ऊर्जा का संकट
ईरान युद्ध की कीमत यूरोप भी चुका रहा है. यूरोपीय देश स्लोवाकिया ने डिजल की जमाखोरी पर प्रतिबंध लगा दिया है. वहीं स्लोवेनिया ने वाहनों के लिए ईंधन की सीमा तय कर दी है.
इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका ने ईंधन की जमाखोरी को रोकने के लिए आवंटन जैसे उपाय लागू कर दिये हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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