Global Sea Routes: काला सागर यूरोप और एशिया के बीच फैला हुआ है जिसकी सीमाएं रूस, यूक्रेन, तुर्की, बुल्गारिया, रोमानिया और जॉर्जिया से जुड़ी हैं. यह अनाज, तेल और सैन्य गतिविधियों के लिहाज से बेहद अहम है. 2014 में क्रीमिया पर कब्जे के बाद रूस का दबदबा बढ़ा था लेकिन 2022 के युद्ध के बाद यूक्रेन ने ड्रोन और मिसाइलों से रूस के जहाजों को नुकसान पहुंचाया. राष्ट्रपति जेलेंस्की का दावा है कि अब रूस का एकतरफा नियंत्रण खत्म हो चुका है और यह क्षेत्र विवादित और प्रतिस्पर्धी बन गया है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
तेल और गैस सप्लाई का सबसे अहम मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है. फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला यह रास्ता दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल व्यापार का केंद्र है. भौगोलिक रूप से ईरान और ओमान के बीच स्थित यह मार्ग अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत खुला है, लेकिन सैन्य दृष्टि से ईरान की पकड़ सबसे मजबूत है. अमेरिका और उसके सहयोगी भी यहां मौजूद रहते हैं, जिससे यह क्षेत्र हमेशा तनाव में रहता है.
बोस्फोरस और डार्डानेल्स
काला सागर से भूमध्य सागर तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता बोस्फोरस और डार्डानेल्स है. इन जलडमरूमध्यों पर पूरा प्रशासनिक नियंत्रण तुर्की के पास है. रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद तुर्की ने मॉन्ट्रो कन्वेंशन के नियमों को सख्ती से लागू कर दिया है और युद्धपोतों की आवाजाही पर रोक लगाई है.
स्ट्रेट ऑफ मलक्का
हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर से जोड़ने वाला स्ट्रेट ऑफ मलक्का दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में शामिल है. एशिया का अधिकांश तेल आयात इसी रास्ते से गुजरता है. इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर मिलकर इसकी सुरक्षा करते हैं. चीन अपनी निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक कॉरिडोर बनाने की कोशिश कर रहा है.
स्वेज नहर
मिस्र की स्वेज नहर यूरोप और एशिया के बीच सबसे छोटा समुद्री रास्ता देती है. यहां से दुनिया के 10 से 12 प्रतिशत व्यापारिक जहाज गुजरते हैं. इसका संचालन मिस्र की Suez Canal Authority करती है और जहाजों से शुल्क लिया जाता है, जो मिस्र की अर्थव्यवस्था का बड़ा स्रोत है.
पनामा नहर
अटलांटिक और प्रशांत महासागर को जोड़ने वाली पनामा नहर जहाजों को हजारों किलोमीटर लंबा चक्कर लगाने से बचाती है. 1914 में बनी इस नहर का नियंत्रण पहले अमेरिका के पास था, लेकिन 1999 से पनामा इसे संचालित कर रहा है.
बाब-अल-मंदेब
लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ने वाला बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य तेल और कंटेनर व्यापार के लिए बेहद अहम है. यहां किसी एक देश का नियंत्रण नहीं है. हूती हमलों के कारण अमेरिका और यूरोपीय देशों की नौसेनाएं लगातार गश्त करती हैं.
ये भी पढ़ें-ईरान ने भारत को कहा धन्यवाद, खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने को बताया दोस्ती की मिसाल
आज समुद्री रास्ते सिर्फ व्यापार के लिए नहीं बल्कि देशों की ताकत दिखाने का जरिया भी बन चुके हैं. काला सागर से लेकर होर्मुज और बाब-अल-मंदेब तक हर जगह सैन्य उपस्थिति और राजनीतिक टकराव साफ नजर आता है. वहीं स्वेज, पनामा और बोस्फोरस जैसे मार्ग किसी एक देश के प्रशासनिक नियंत्रण में हैं. 2026 की स्थिति यही बताती है कि समुद्री व्यापारिक मार्ग वैश्विक राजनीति और सुरक्षा का सबसे बड़ा केंद्र बन चुके हैं.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.




