मक्का समझौते के बाद भी सऊदी अकेला क्यों?
Saudi Houthi Attacks: पिछले एक हफ्ते से हूती विद्रोही सऊदी अरब पर लगातार हमले कर रहे हैं. 8 सितंबर को चार शहरों पर एक साथ हमला हुआ जिसमें 73 लोग घायल हो गए. तेल निर्यात पर भी बड़ा असर पड़ा और रोजाना 4 लाख बैरल की सप्लाई रुक गई.
सऊदी को नहीं मिली मदद
इन हालात में न तो पाकिस्तान (Pakistan) और न ही तुर्की ने सऊदी को मदद दी है. इस चुप्पी को लेकर सवाल उठ रहे हैं. इसी बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बयान दिया कि अगर हमले जारी रहे तो पाकिस्तान युद्ध में उतर सकता है.
मक्का समझौते का जिक्र
आसिफ ने कहा कि हूती हमलों के कारण मक्का समझौता सक्रिय हो गया है. इस समझौते के तहत सऊदी (Saudi), पाकिस्तान (Pakistan) और तुर्की (Turki) ने तय किया है कि किसी एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा. इसमें संयुक्त रक्षा अभ्यास और खुफिया जानकारी साझा करने की बात भी शामिल है. इसे इस्लामिक नाटो कहा जा रहा है.
सऊदी में पाकिस्तान के जवान की तैनाती
रिपोर्ट्स के मुताबिक सऊदी में पाकिस्तान के 8 हजार जवान पहले से मौजूद हैं. हालांकि अभी तक उन्हें कार्रवाई का आदेश नहीं मिला है. पाकिस्तान ने वादा किया है कि जरूरत पड़ने पर 80 हजार जवान और भेजे जा सकते हैं. साथ ही परमाणु सुरक्षा देने की भी बात कही गई है.
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आगे का परिदृश्य
हालात गंभीर हैं और सऊदी पर दबाव बढ़ रहा है. पाकिस्तान का बयान संकेत देता है कि अगर हमले जारी रहे तो मध्य पूर्व की जंग और बड़ी हो सकती है. मक्का समझौते के चलते यह मामला सिर्फ सऊदी तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे क्षेत्र को प्रभावित करेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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