Bharat Express DD Free Dish
Pension Mission Shakti Digital
Pension Mission Shakti Digital

बलूचिस्तान में हत्याकांड करा रही है पाकिस्तान की सेना! पाक की ‘छद्म मिलिशिया’ नीति का खुलासा

पाकिस्तान और उसकी सेना लगातार सवालों के घेर में घिरी रहती है. एक बार फिर उसपर बलूचिस्तान में तीन और बलूच नागरिकों को जबरन गायब करने का आरोप लगा है.

Paank Alleges Pakistan Army

एक मानवाधिकार संगठन ने सोमवार को आरोप लगाया कि पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने बलूचिस्तान में तीन और बलूच नागरिकों को जबरन गायब कर दिया. इसकी वजह से इस अस्थिर प्रांत में लोगों के गायब होने की बढ़ती संख्या में इजाफा हो गया है. यह ताजा घटना बलूच नागरिकों को जबरन गायब करने, न्यायेतर हत्याओं और यातनाओं के बढ़ते मामलों के साथ उत्पीड़न की निरंतर घटनाओं के बीच हुई है. इस बीच, पांक ने तुम्प जिले में पाकिस्तान समर्थित मौत दस्तों द्वारा एक युवा बलूच छात्र अब्दुल रहमान की दिनदहाड़े नृशंस हत्या की स्पष्ट रूप से निंदा की.

बलूच राष्ट्रीय आंदोलन के मानवाधिकार विभाग, पांक ने बताया कि 30 और 31 अक्टूबर के बीच, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने बलूचिस्तान के केच जिले में स्थित तुर्बत शहर के बहामन इलाके में एक घर पर छापा मारा. इस कार्रवाई के दौरान, तीन लोगों को उनके घरों से जबरन गायब कर दिया गया. पीड़ितों की पहचान यासिर, वहीद अहमद और ज़रीफ़ अहमद के रूप में हुई है.

पाकिस्तान की सेना द्वारा हत्याकांड

मानवाधिकार संस्था ने कहा कि हमें बेहद परेशान करने वाली रिपोर्टें मिली हैं जो दर्शाती हैं कि यह ‘अज्ञात लोगों’ द्वारा की गई कोई आकस्मिक हिंसा नहीं थी, बल्कि पाकिस्तानी सेना द्वारा समर्थित राज्य-प्रायोजित मौत दस्तों द्वारा किया गया एक लक्षित, न्यायेतर हत्याकांड था. एक छात्र को उसकी ही दुकान में, उसके पिता के सामने जानबूझकर मार डालना, बलूच जनता को चुप कराने, डराने और सामूहिक रूप से दंडित करने के लिए रची गई आतंक की एक रणनीति है.

ये भी पढ़ें: फर्जी डिग्री पर असली अस्पताल! RTI से खुले जेवर की ‘अमृत हॉस्पिटल’ के राज; बिना एडमिशन डॉक्टर कैसे बने नितेश राणा?

छद्म मिलिशिया का इस्तेमाल

पांक ने कहा कि यह घटना पाकिस्तान की उस नीति का एक स्पष्ट उदाहरण है जिसमें वह बलूच लोगों के खिलाफ छद्म मिलिशिया का इस्तेमाल करके हिंसा को बढ़ावा देती है और इसे कानून-व्यवस्था की स्थिति का नाम देती है. अधिकार संस्था ने जोर देकर कहा, “जब राज्य-समर्थित तत्व इतनी बेरहमी से हत्या कर सकते हैं, तो यह कानून-व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि उसका कार्यान्वयन है. यह कृत्य जीवन के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है और बलूचिस्तान में न्याय व्यवस्था के पूर्ण पतन को उजागर करता है.

नोट- यह खबर एजेंसी (IANS) फीड से सीधे पब्लिश की गई है. इसमें किसी भी जानकारी को नहीं बदला गया है. खबर को पढ़ने लायाक बनाने के लिए लिए केवल हेडलाइन बदली गई है. वहीं पैराग्राफ से पहले सबहेड जोड़े गए हैं. इस स्टोरी को लेकर भारत एक्सप्रेस की किसी भी तरह की नैतिक जिम्मेदारी नहीं होगी.



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Pension Mission Shakti Digital