Jawar Amrit Hospital Exposed: जेवर में चल रहे ‘अमृत अस्पताल’ की हैरान कर देने वाली सच्चाई सामने आई है, जिसने पूरे स्वास्थ्य विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है. एक RTI के खुलासे में पता चला है कि अस्पताल के मालिक नीतेश राणा न केवल डॉक्टर नहीं हैं, बल्कि उन्होंने छत्तीसगढ़ की यूनिवर्सिटी की फर्जी MBBS डिग्री के आधार पर अस्पताल का रजिस्ट्रेशन हासिल किया. यूनिवर्सिटी ने स्वयं यह पुष्टि की है कि वह MBBS पाठ्यक्रम में कभी प्रवेशित ही नहीं हुए थे. इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि यह फर्जी अस्पताल न केवल आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का इलाज कर रहा था, बल्कि बुलंदशहर में भी इसी व्यक्ति का एक और अस्पताल संचालित हो रहा है.
अमृत अस्पताल (Amrit Hospital) के पीछे की सच्चाई जानकर आप हैरान रह जाएंगे. इस अस्पताल को देखकर कोई अंदाजा नहीं लगा सकता कि यहां सब कुछ फर्जी है. अस्पताल के मालिक नीतेश राणा डॉक्टर हैं ही नहीं, लेकिन इसके बावजूद वह अस्पताल चला रहे हैं. इसका खुलासा एक RTI में हो गया है कि उन्होंने फर्जी डिग्री के आधार पर अस्पताल का रजिस्ट्रेशन लिया है.
फर्जी डिग्री के आधार पर मिला Amrit Hospital
नीतेश कुमार को उत्तर प्रदेश सरकार ने उनकी छत्तीसगढ़ की यूनिवर्सिटी के डिग्री के आधार पर अस्पताल चलाने की अनुमति दी है. गौतम बुद्ध नगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय ने भी डॉ. नितेश कुमार की एमबीबीएस डिग्री के सत्यापन के लिए छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालय को पत्र लिखा है. छत्तीसगढ़ यूनिवर्सिटी से इस बारे में जानकारी ली गई तो पता चला कि नीतेश की डिग्री फर्जी है. यूनिवर्सिटी ने आरटीआई के जवाब में इस डिग्री को गलत बताया है.

RTI में सब आया सामने
नोएडा के जेवर में चल रहे अमृत अस्पताल का पंजीयन जेवर निवासी नीतेश राणा के नाम पर है. इसकी पंजिकरण संख्या CMEE25121211 है. मजे की बात यह है कि नीतेश कुमार डॉक्टर हैं ही नहीं. उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें उनकी छत्तीसगढ़ की यूनिवर्सिटी के डिग्री ( डिग्री संख्या 184947) के आधार पर अस्पताल दिया है लेकिन छत्तीसगढ़ यूनिवर्सिटी ने एक आरटीआई में इस डिग्री को गलत बताया है.

RTI में पूछे गए सवाल और उसके जवाब कुछ इस प्रकार हैं.
क्या नितेश कुमार ने CIMS बिलासपुर से MBBS पाठ्यक्रम पूर्ण किया है?
उत्तर- छात्र इस संस्थान के एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेशित ही नहीं हुआ है.क्या नितेश कुमार ने CIMS बिलासपुर से वर्ष 2020 में रोटेटरी इंटर्नशिप कार्यक्रम पूर्ण किया है?
उत्तर- उक्त छात्र इस संस्थान से रोटेटरी इंटर्नशिप नहीं किया है.क्या उन्होंने फरवरी 2020 में उक्त संस्थान से उत्तीर्ण?
उत्तर- छात्र इस संस्थान में प्रवेशित नहीं होने के कारण फरवरी 2020 में संस्थान से उत्तीर्ण नहीं किया है.
आयुष्मान योजना के मरीजों का इलाज
हैरत की बात यह है कि इस अस्पताल (Amrit Hospital) को आयुष्मान योजना के मरीजों को भर्ती करने के लिए शासन से अनुमति मिली हुई है. इसके अलावा अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन भी लगी हुई है. इस अस्पताल पर पहले भी अनियमितता के आरोप लगे हैं. इसके बाद भी विभाग और अधिकारी इस अस्पताल और डॉक्टर के गिरेबान तक नहीं पहुंच पाए हैं.

बुलंदशहर में भी चलता है अस्पताल
नीतेश राणा बुलंदशहर जिले में राणा अस्पताल के नाम से एक और अस्पताल चला रहे हैं. स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत से यह अस्पताल चल रहा है. कई बार इस अस्पताल की भी शिकायत सामने आ चुकी है. हालांकि, इसके बाद भी उनका कारोबार बढ़िया चल रहा है.

कार्रवाई की मांग
अब सवाल उठता है कि आखिर कैसे एक फर्जी डॉक्टर को अस्पताल चलाने की अनुमति मिल गई? स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी इस मामले में संदिग्ध लग रही है. कार्रवाई की मांग करते हुए लोगों ने कहा कि ऐसे फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. क्योंकि, एक ऐसे अस्पताल को आयुष्मान योजना के तहत मरीजों के इलाज की अनुमति देना, जिसका मालिक खुद फर्जी डॉक्टर हो, सार्वजनिक स्वास्थ्य के साथ बड़ा खिलवाड़ है. अब, RTI के खुलासे के बाद, यह आवश्यक है कि न केवल नीतेश राणा और उनके बुलंदशहर स्थित दूसरे अस्पताल के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो.
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