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IAEA परमाणु निगरानी के नाम पर राजनीतिक दबाव का बन चुकी है उपकरण, ईरान का IAEA पर बड़ा आरोप

ईरान ने IAEA पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि एजेंसी परमाणु निगरानी के नाम पर राजनीतिक दबाव का उपकरण बन चुकी है. ईरानी अधिकारियों का दावा है कि IAEA की हालिया रिपोर्टें पक्षपातपूर्ण हैं

Tension between Iran and the International Atomic Energy Agency

ईरान और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के बीच तनाव

ईरान और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के बीच तनाव एक बार फिर सतह पर है. ईरान ने IAEA पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि एजेंसी परमाणु निगरानी के नाम पर राजनीतिक दबाव का उपकरण बन चुकी है. ईरानी अधिकारियों का दावा है कि IAEA की हालिया रिपोर्टें पक्षपातपूर्ण हैं और पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका और इजरायल के प्रभाव में तैयार की गई हैं.

ईरान का कहना है कि IAEA उसके परमाणु कार्यक्रम को गलत तरीके से प्रस्तुत कर रहा है और निरीक्षण रिपोर्टों में पुरानी एवं समाप्त हो चुकी गतिविधियों को जबरन उछाल रहा है. ईरानी परमाणु ऊर्जा संगठन के प्रमुख मोहम्मद इस्लामी ने आरोप लगाया है कि IAEA अमेरिकी कांग्रेस के कानूनों और इजरायली एजेंसियों की तरफ से सौंपे गए “नकली दस्तावेजों” के आधार पर रिपोर्ट बना रहा है. ईरान के अनुसार, ये रिपोर्टें किसी भी तकनीकी निष्पक्षता से रहित हैं और पूरी तरह राजनीतिक एजेंडे से प्रेरित हैं.

ईरान ने IAEA पर ये लगाया आरोप

ईरान ने यह भी दावा किया कि IAEA की रिपोर्टों में जिन गतिविधियों को गुप्त बताया जा रहा है, वे दशकों पुरानी हैं और उनके बारे में एजेंसी को पहले से जानकारी दी गई थी. इसके बावजूद एजेंसी ने उन घटनाओं को एकतरफा तरीके से पेश किया, जिससे विश्व समुदाय में भ्रम और दबाव की स्थिति बनी. ईरान का यह भी आरोप है कि IAEA निरीक्षकों के द्वारा एकत्र की गई संवेदनशील सूचनाओं का लीक होना और उसका बाहरी देशों द्वारा इस्तेमाल किया जाना गंभीर सुरक्षा उल्लंघन है.

IAEA की भूमिका पर उठाये सवाल

इस विवाद के बीच ईरान ने IAEA के निरीक्षकों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं. ईरानी सांसदों ने एजेंसी के कुछ अधिकारियों पर जासूसी करने तक के आरोप लगाए हैं और दावा किया है कि इन निरीक्षकों से प्राप्त जानकारी का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमलों की योजना बनाने में किया गया. IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रोसी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि एजेंसी निष्पक्ष और वैज्ञानिक आधार पर काम करती है, और उसका मकसद केवल यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी देश में परमाणु ऊर्जा का उपयोग केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए हो. फिर भी, ईरान की शिकायतें और आरोप इस बात का संकेत हैं कि पश्चिम एशिया में परमाणु कार्यक्रमों को लेकर पारदर्शिता और विश्वास की कमी बनी हुई है.

ये भी पढ़ें- परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग की वैश्विक निगरानी संस्था IAEA क्या है और क्यों है यह इतना अहम?

NPT से बाहर निकलने पर ईरान कर सकता है विचार

इन आरोपों के बाद ईरान ने संकेत दिया है कि यदि IAEA का रवैया नहीं बदला, तो वह परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से बाहर निकलने पर भी विचार कर सकता है. इससे क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता पर गंभीर असर पड़ सकता है. IAEA और ईरान के बीच का यह विवाद केवल तकनीकी नहीं बल्कि कूटनीतिक और राजनीतिक आयाम भी रखता है.

– भारत एक्सप्रेस



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