वैश्विक निगरानी संस्था IAEA क्या है
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) दुनिया की एक महत्वपूर्ण संस्था है जो यह सुनिश्चित करती है कि परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए किया जाए. इसकी स्थापना 29 जुलाई 1957 को की गई थी और इसका मुख्यालय ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में स्थित है. यह संस्था संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र सहयोगी संस्था है, लेकिन इसका कार्यक्षेत्र पूरी दुनिया में फैला हुआ है. वर्तमान में IAEA के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रोसी (Rafael Mariano Grossi) हैं.
IAEA का मुख्य उद्देश्य परमाणु ऊर्जा का उपयोग बिजली उत्पादन, चिकित्सा, कृषि और उद्योग जैसे क्षेत्रों में बढ़ावा देना है, लेकिन इसके साथ-साथ यह यह भी सुनिश्चित करता है कि कोई भी देश इस तकनीक का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने के लिए न करे. एजेंसी के काम का मूलमंत्र है: “Atoms for Peace and Development” यानी “शांति और विकास के लिए परमाणु ऊर्जा.”
परमाणु तकनीकों का उपयोग करने वाले देशों की करती है निगरानी
IAEA उन देशों की निगरानी करता है जो परमाणु तकनीक का उपयोग कर रहे हैं. इसके विशेषज्ञ निरीक्षण करते हैं कि वहां कोई गुप्त रूप से परमाणु हथियार तो नहीं बनाए जा रहे. यदि किसी देश द्वारा परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का उल्लंघन किया जाता है, तो IAEA इसकी रिपोर्ट सीधे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भेजता है. इसके अलावा, एजेंसी परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा, रेडिएशन नियंत्रण और पर्यावरणीय मानकों के निर्धारण में भी सक्रिय भूमिका निभाती है.
विकासशील देशों को प्रदान करती है तकनीकी सहयोग
IAEA विकासशील देशों को तकनीकी सहयोग और प्रशिक्षण भी प्रदान करता है ताकि वे सुरक्षित ढंग से परमाणु ऊर्जा का उपयोग कर सकें. यह संस्था वैश्विक स्तर पर परमाणु विज्ञान और तकनीक में समानता और पारदर्शिता बनाए रखने का कार्य करती है.
भारत और IAEA के संबंध काफी मजबूत
भारत और IAEA के संबंध भी समय के साथ काफी मजबूत हुए हैं. 2008 में भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के तहत भारत ने IAEA को अपने 14 परमाणु संयंत्रों के निरीक्षण की अनुमति दी थी. इस कदम ने भारत को वैश्विक परमाणु व्यापार का हिस्सा बनाया और तकनीकी सहयोग के नए रास्ते खोले.
परमाणु अप्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही
IAEA की भूमिका केवल तकनीकी निगरानी तक सीमित नहीं है, यह परमाणु अप्रसार, वैश्विक सुरक्षा और सामूहिक विश्वास निर्माण में भी अहम भूमिका निभा रही है. ईरान, उत्तर कोरिया और रूस जैसे देशों की परमाणु गतिविधियों को लेकर जब भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता उठती है, तो IAEA को ही निष्पक्ष जानकारी का सबसे विश्वसनीय स्रोत माना जाता है.
निष्कर्षतः, IAEA वैश्विक शांति, सुरक्षा और वैज्ञानिक सहयोग का एक ऐसा स्तंभ है जो यह सुनिश्चित करता है कि परमाणु ऊर्जा मानवता के लाभ के लिए उपयोग हो, विनाश के लिए नहीं. दुनिया में परमाणु संतुलन और पारदर्शिता बनाए रखने में इसकी भूमिका अत्यंत अहम है.
– भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


