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ट्रंप की धमकियों को ठेंगा! भारत-रूस की उस गुप्त डील का सच जिससे कांप उठा अमेरिका

India Russia Oil Trade: भारत और रूस के बीच रुपये में बढ़ते तेल व्यापार, डॉलर पर घटती निर्भरता, स्पेशल रुपी वोस्ट्रो अकाउंट और अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच नई आर्थिक रणनीति की पूरी जानकारी.

India Russia Oil Trade: भारत और रूस के बीच आर्थिक सहयोग लगातार नई दिशा में बढ़ रहा है. खास तौर पर ऊर्जा व्यापार को लेकर दोनों देशों ने ऐसा मॉडल अपनाया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चा बटोरी है. अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बीच भी भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए रूस से तेल खरीदना जारी रखा. इतना ही नहीं, भुगतान के लिए डॉलर की जगह भारतीय रुपये का इस्तेमाल बढ़ाकर एक अलग रास्ता भी तैयार किया.

रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए. रूस को अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणाली SWIFT से बाहर कर दिया गया, जिससे डॉलर में लेन-देन करना बेहद मुश्किल हो गया. माना जा रहा था कि इससे रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर भी असर पड़ेगा, लेकिन भारत ने अपनी रणनीति बदलने के बजाय वैकल्पिक व्यवस्था विकसित करने का फैसला किया.

भारतीय रुपये में हो रहा व्यापार

हाल के सरकारी और व्यापारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत ने कुछ महीनों के भीतर लगभग 15 अरब डॉलर के आयात का भुगतान भारतीय रुपये में किया. इसमें सबसे बड़ा हिस्सा रूस से खरीदे गए कच्चे तेल का बताया जा रहा है. पहले तेल आयात के लिए भारतीय कंपनियों को डॉलर खरीदने पड़ते थे, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता था. अब रुपये में भुगतान होने से इस दबाव में कमी आई है.

स्पेशल अकाउंट के जरीए हो रहा भुगतान

इस व्यवस्था को लागू करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों के तहत भारत में मौजूद रूसी बैंकों के लिए स्पेशल रुपी वोस्ट्रो अकाउंट खोले गए. भारतीय कंपनियां तेल खरीदने के बाद भुगतान सीधे इन खातों में रुपये के रूप में जमा करती हैं. इससे लेन-देन की प्रक्रिया आसान हुई और डॉलर पर निर्भरता कुछ हद तक कम करने में मदद मिली.

भारत में कर रहे निवेश

हालांकि शुरुआत में यह व्यवस्था आसान नहीं थी. रूस की चिंता थी कि भारत से उसका आयात अपेक्षाकृत कम है, जबकि भारत रूस से बड़ी मात्रा में तेल और अन्य सामान खरीदता है. ऐसे में रूस के पास बड़ी मात्रा में भारतीय रुपये जमा हो रहे थे, जिनका उपयोग सीमित था. इसी कारण रूस ने कुछ समय तक युआन या यूएई दिरहम जैसी अन्य मुद्राओं में भुगतान की भी इच्छा जताई थी.


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बाद में दोनों देशों ने इस चुनौती का समाधान खोजने की दिशा में काम किया. अब रूस के पास मौजूद रुपये का इस्तेमाल भारत में सरकारी बॉन्ड, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, विनिर्माण क्षेत्र और अन्य निवेशों में किया जा रहा है. इसके साथ ही रूस ने भारत से दवाइयों, ऑटो पार्ट्स, मशीनरी और कृषि उत्पादों का आयात भी बढ़ाना शुरू किया है, जिससे दोनों देशों के व्यापार को अधिक संतुलित बनाने की कोशिश हो रही है.

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक व्यापार में डॉलर की भूमिका अभी भी सबसे मजबूत है और उसे तुरंत किसी दूसरी मुद्रा से बदल पाना संभव नहीं है. फिर भी भारत और रूस के बीच स्थानीय मुद्रा में बढ़ता व्यापार यह संकेत देता है कि कई देश अब अंतरराष्ट्रीय लेन-देन के लिए नए विकल्प तलाश रहे हैं. भारत के लिए यह कदम ऊर्जा सुरक्षा, विदेशी मुद्रा भंडार के बेहतर प्रबंधन और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक पहल माना जा रहा है.

-भारत एक्सप्रेस



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